क्या नेताओं पर लाठी चला सकती हैं सिंघम आईपीएस स्वीटी सहरावत? अगर नहीं तो फिर जरा इन तस्वीरों को ध्यान से देखिए, जब सर्द रातों में स्वीटी के आदेश के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों की ऐसी कुटाई हुई कि हम आपको पूरी तस्वीर दिखा भी नहीं सकते. तो ये जानना आपके जरूरी हो जाएगा कि आखिर ये स्वीटी सहरावत हैं कौन? लाठी चलाने का आदेश इन्होंने किसी के दबाव में दिया या जरूरी था. ये भी तय हो जाएगा. देश का लोकतंत्र कहता है कि भारत की जमीन पर भारत के बच्चे कहीं भी किसी स्थिति में शांति से प्रदर्शन करने का अधिकार रखते हैं,और अपनी बात के लिए सरकार को अपनी ताकत भी दिखा सकते हैं. कानून भी कहता है कि लाठीचार्ज या फायरिंग की स्थिति में पुलिस अपने सीनियर अधिकारियों के आदेश पर ही बल प्रयोग कर सकती है.
यानि छात्र जहां आंदोलन करे तो आईपीएस हो या आईएएस वो अपने सिंघम होने का एहसास उन्हें जरूर करवाएगा, जिस लाइन में वो भी कभी छात्र बनकर खड़े थे. बिहार में लोकतंत्र कैसे नाचा, जरा इसका तमाशा भी आपको दिखाते हैं. नए-नए नेताजी प्रशांत किशोर जैसे सियासत में जबरन नेता बने फिर रहे हैं, वैसे ही छात्रों के आंदोलन में जबरन घुस गए, छात्रों ने ऐसा लताड़ा कि चश्मा सही करते हुए वहां से भागना पड़ा....हर मसले में उछल-कूद करने वाले पप्पू यादव भी राजनीति का तमाशा करने छात्रों के आंदोलन में पहुंचे...खान हों या गुरु रहमान हर किसी पर भूत सवार था, छात्रों के आंदोलन को कुचलकर खुद बड़के नेता बन जाएं.....फिर भी छात्रों का साहस देखिए कि वो डटे हैं. नीतीश का तमाशा देखिए उनके राज में छात्रों पर रात दो बजे पानी की बौछार मारी जाती है. और उनकी ही सरकार में SP स्वीटी सहरावत क्या अपनी ही पुलिस को आदेश देती हैं कि छात्रों को लाठी के तले कुचल दो, लेकिन कुछ किरदार और हैं, जो छात्रों पर हो रही तानाशाही के जिम्मेदार हैं.