यूपी में एक से एक तेजतर्रार और सिंघम आईएएस, आईपीएस हैं, कोई संभल से सच निकाल रहा है, तो कोई महाकुंभ के सफल आयोजन में व्यस्त है, किसी ने आजम खान का किला ढहाया तो किसी ने मुख्तार जैसे माफिया का अंत किया, लेकिन प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए जब लिस्ट जारी होती है, तो उसमें इनका नाम होता, बल्कि साल 2023 के बेस्ट 10 डीएम में यूपी की इकलौती डीएम मोनिका रानी का नाम है, जिन्हें पीएम मोदी सम्मान देने वाले हैं. कहा जाता है ये दिमाग से इतनी तेजतर्रार हैं, कि माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों की हेकड़ी निकाल देती हैं, आदमखोकर जानवर अगर ज्यादा चालाकी करे तो उसके लिए अलग रणनीति बनाती हैं.

जनता हो सुकून में देखना ही इनकी जिंदगी का लक्ष्य है, और सरकारी योजनाओं को घर-घर पहुंचाना ही मकसद. आप समझ गए होंगे कि हम नेपाल सीमा से सटे बहराइच जिले की बात कर रहे हैं, जहां की डीएम मोनिका रानी के कामों की चर्चा पीएमओ तक हो रही है, ऐसे में वो किस्सा जानना जरूरी हो जाता है, जब इन्होंने दंगाईयों को उल्टे पांव खदेड़ दिया था, हालांकि कुछ लोगों ने इनकी आलोचना भी की थी, पर वो बताएं उससे पहले सुनिए मोनिका रानी आखिर हैं कौन और इनके संघर्ष की कहानी क्या है.
कौन हैं मोनिका रानी?
हालांकि बाकी अधिकारियों की तरह इनकी जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव आए, फर्रुखाबाद में बतौर डीएम पोस्टिंग मिलने के बाद वेटिंग में डाल दिया गया, लेकिन अपने काम-काज से इन्होंने जनता और सरकार के दिल में ऐसी जगह बनाई कि वेटिंग के बाद सीधा यमुना प्राधिकरण की सीईओ बनीं, और फिर साल 2023 में जब भेड़िए का आतंक बहराइच में छाया हुआ था, तब इन्हें वहां की डीएम बनाकर सरकार ने भेजा, आईपीएस वृंदा शुक्ला के साथ मिलकर इन्होंने ऑपरेशन भेड़िया चलाया, आदमखोर भेड़िये के भय से लोगों को मुक्त किया, और उसके बाद जब बहराइच में दंगा हुआ तो खुद लाठी लेकर सड़कों पर उतर गईं, जिसकी तस्वीर देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में वायरल हुई.
किसी ने इन्हें सुपरवुमैन कहा तो किसी ने सिंघम IAS की उपाधि दी, पर सिर्फ इन तस्वीरों के आधार पर नहीं, बल्कि इनके पूरे कार्यकाल का मूल्यांकन करने के बाद इन्हें प्रधानमंत्री पुरस्कार देने का फैसला लिया गया है, ये देश के उन 10 तेजतर्रार जिले के डीएम की लिस्ट में शामिल हैं, जिन्हें पीएम मोदी अपने जिले में सर्वांगीण विकास के लिए पुरस्कृत करेंगे.