...ये हैं आईपीएस जीवी सुंदर चक्रवर्ती.... जिन्होंने कश्मीर से दिल्ली में अलर्ट कॉल की, जिन्होंने पाकिस्तान की ओर से तैयार किए गए डॉक्टर आतंकियों के ग्रुप का डॉक्टर बनकर इलाज किया. कोई इन्हें फरिश्ता तो कोई फौलाद कह रहा है....इन्होंने जो काम किया है, उसका किस्सा सुन हर हिंदुस्तानी इन्हें सैल्युट करेगा....
तारीख थी 17 अक्टूबर 2025...जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के नौगाम में सुरक्षाबलों को एक पोस्टर दिखाई देता है. जिस पर जैश कमांडर हंजला भाई के साइन थे. पहली नजर में ये पोस्टर सबको सामान्य लगा, क्योंकि कश्मीर में ऐसे कई पोस्टर पहले भी नजर आए हैं....लेकिन श्रीनगर के एसएसपी डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती ने जैसे ही इसे देखा, इसके बड़े खतरे को भांप लिया....इन्होंने तुरंत पोस्टर लगाने वाले से लेकर पूरे इलाके की सीसीटीवी फुटेज न सिर्फ स्वंय देखे, बल्कि कई लोगों को गिरफ्तार कर ये भी पता करवा लिया कि ये पोस्टर नहीं बल्कि दुश्मनों का एक मैसेज है, जिसकी नापाक गूंज दिल्ली तक सुनाई दे सकती है.....इनका मानना है ''छोटी धमकी भी बड़े खतरे की आहट होती है..'' इसीलिए इन्होंने इस केस की तह तक जांच करवाई, और मौलाना इरफान से गहन पूछताछ में नापाक मंसूबे वाले डॉक्टर ब्रिगेड की पूरी कड़ियां जोड़ डाली.
इनकी जांच का नतीजा ये हुआ कि एक व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ...इनकी कार्रवाई का असर एक नहीं बल्कि चार राज्यों में एक साथ दिखा. श्रीनगर, फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश तक फैले इस नेटवर्क में शामिल कश्मीरी डॉक्टर मुजम्मिल, अदील अहमद और डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया गया.
जांच में ये भी पता चला दुश्मनों का मंसूबा एक साथ कई शहरों को दहलाने की थी...लेकिन आईपीएस डॉ. संदीप के तेजतर्रार दिमाग के आगे उनकी सारी साजिशें समय से पहले ही नाकाम हो गई, ऐसे में ये हैं कौन, इनके बारे में जानना बेहद जरूरी हो जाता है.
कौन हैं IPS जीवी संदीप चक्रवर्ती
इसलिए श्रीनगर में इन्हें कोई खास चुनौती पेश नहीं आई, बल्कि इन्होंने अपनी रणनीति की बदौलत देश की सुरक्षा को न सिर्फ मजबूत किया, बल्कि पीओके में महीनों से चल रही बड़ी साजिश को कुछ ही दिनों में फेल कर दिया...इनकी बहादुरी के चर्चे दिल्ली तक रहे हैं. आतंक के खिलाफ मोर्चे पर डटे IPS ऑफिसर जीवी संदीप को 6 बार राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है. निडर सोच और दुश्मनों के काल बने इन आईपीएस साहब को चार बार जम्मू-कश्मीर पुलिस वीरता पदक से भी नवाजा गया है.
जिन्होंने अपने तेजतर्रार दिमाग से देश को दहलाने से एक नहीं कई बार बचाया, अनगिनत जिंदगियों को सुरक्षित रखा, और अब श्रीनगर में शांति की बयार बहाने में लगे हैं. जहां पहले बच्चों के हाथों में पत्थर होते थे, उन्हें कलम पकड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. चूंकि दिल्ली में हुए धमाके के बाद कई विपक्षी नेता सुरक्षाबलों और खुफिया विभाग पर ही सवाल उठाने लगे, और अखिलेश यादव तो ये तक कहने लगे कि खुफिया विभाग को ही बंद कर देना चाहिए, तो ऐसे में IPS संदीप जैसे जांबाजों की कहानी हिंदुस्तान के हर फोन तक पहुंचना जरूरी हो जाता है कि हमारे अधिकारी कितने काबिल और कितने सक्षम हैं. जिन्होंने समय रहते देश में बड़ी घटना होने से रोक लिया.