अभिषेक चतुर्वेदी
30 साल की एक लड़की 130 देशों के सामने पाकिस्तान की ऐसी पोल खोलती है, पूरा हिंदुस्तान एक सुर में उसकी तारीफ करने लगता है. वो संयुक्त राष्ट्र में बैठकर शहबाज शरीफ के एक-एक झूठ ऐसे बेनकाब करती है. जैसे जयशंकर यूरोपियन मुल्क को आईना दिखाते हैं. ये लड़की कौन है, संयुक्त राष्ट्र में इतने बड़े पद पर कब पहुंची ये पूरी कहानी आप इस रिपोर्ट से समझ सकते हैं. सात समंदर पार से लेकर दिल्ली और इस्लामाबाद तक इस भाषण के चर्चे हैं.
शहबाज शरीफ- कश्मीर के लाखों लोग बुरहान वानी की विचारधारा को मानते हैं और वो लगातार लड़ रहे हैं.
भाविका मंगलनंदन- आतंकवाद के साथ कोई समझौता नहीं, भारत के खिलाफ सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देना इन हालातों को निमंत्रण दे रहा है.
भाविका मंगलनंदन- ये बड़ा बेतुका है, जो 1971 में नरसंहार का दोषी है, जहां अल्पसंख्यकों के साथ क्या हो रहा है, वो सहिष्णुता और इस्लामोफोबिया की बात कर रहे हैं. ये पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान असल में क्या है. मिस्टर प्रेसिडेंट, हम उस देश की बात कर रहे हैं, जिसने ओसामा बिन लादेन को रखा, जिसने भारत समेत दुनियाभर में कई ऐसी घटनाएं करवाई, जो ड्र/ग्स की सप्लाई करवा रहा है, उसके प्रधानमंत्री जो कह रहे हैं, वो सरासर झूठ है, वो किसी भी हाल में स्वीकार नहीं है.
भाविका मंगलनंदन के इस भाषण के बाद हर कोई ये पूछ रहा है कि ये लड़की आखिर कौन है, जिन्होंने 3 मिनट के भीतर शहबाज के सारे झूठ बेनकाब कर डाले. हमने जब रिसर्च की तो पता चला ये साल 2015 बैच की IFS ऑफिसर हैं. ये वो दौर था जब विदेश सेवा में आने वाले ऑफिसर जयशंकर के साथ काम करने को न सिर्फ उत्सुक रहते थे, बल्कि कुछ नया सीखना चाहते थे और जयशंकर ने भाविका मंगलनंदन का न सिर्फ तेजतर्रारपन देखा बल्कि मोदी सरकार ने भाविका को यूएन में भारत का प्रतिनिधि बनाकर भी भेज दिया. माथे पर बिंदी और साड़ी पहनीं भाविका ने जिस अंदाज में भारत का मान यूएन में बढ़ाया उसकी जयशंकर भी हो सकता है तारीफ करें.
कौन हैं भाविका मंगलनंदन
ये सारी जानकारी इनकी लिंकडिन प्रोफाइल से मिलती है. जो ये बताता है कि सफलता की संयुक्त राष्ट्र वाली सीढ़िया चढ़ने से पहले इन्होंने कितनी मेहनत की है. ऐसे अधिकारी अगर हर जगह हों तो सोचिए पाकिस्तान का झूठ बेनकाब करना हो या यूरोपियन मुल्क का, हिंदुस्तान के लिए कितना आसान होगा, और भारत का मान इन्हीं अधिकारियों की बदौलत दुनिया में कितना बढ़ता है. इसलिए ऐसे ऑफिसर्स को न सिर्फ सैल्युट करना चाहिए, बल्कि नवरात्रि से पहले भाविका ने जिस तरह चंडी का रूप धारण कर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पोल खोली है, आपको इनका हौसला भी बढ़ाना चाहिए. ये हिंदुस्तान की वो नई पीढ़ी है जिसके सामने दुनिया के बड़े-बड़े देशों को बोलने से पहले भी सोचना होगा.