ये तस्वीरें सोमनाथ मंदिर के पास की है, जहां आधी रात को 36 बुलडोजर पहुंचे तो हंगामा खड़ा हो गया, करीब 2 घंटे तक पुलिसकर्मी ये समझाते रहे कि अवैध निर्माण हटाना ही होगा, लेकिन जब अब्दुल का ग्रुप नहीं माना और हाथों में पत्थऱ उठाने की तैयारी होने लगी तो गुजरात पुलिस ने वही इलाज किया, जो यूपी पुलिस बुलडोजर एक्शन के वक्त करती है.
बुलडोजर से पहले ‘ऑपरेशन साइलेंट पत्थर’ लॉन्च
लेकिन बावजूद उसके कुछ लोग हंगामा करने से बाज नहीं आए, जिनका गुजरात पुलिस ने न सिर्फ मुकम्मल इलाज किया, बल्कि करीब 70 लोगों को हिरासत में लेकर ये संदेश भी दिया कि बुलडोजर के बीच आओगे तो सलाखों के पीछे जाओगे. 28 सितंबर की सुबह करीब 5 बजे से लेकर अगले कुछ घंटों तक में 36 बुलडोजर, 5 पोकलेन, 50 ट्रैक्टर और 10 डंपर ने हर अवैध निर्माण को ऐसे ढहाया, जैसे माफियाओं का महल ढहाया जाता है, बुलडोजर एक्शन के बाद पूरे इलाके को देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे पूरा का पूरा खाली मैदान हो. लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि ये पहली बार नहीं है, जब सोमनाथ मंदिर के पास बुलडोजर एक्शन हुआ हो, बल्कि इसी साल जनवरी महीने में प्रशासन ने 175 अवैध मकानों पर बुलडोजर चलाया था, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सोमनाथ मंदिर की जमीनों पर किस भूमाफिया की नजर है, तो इसे समझने के लिए आपको 6 महीने पहले चले बुलडोजर की कहानी समझनी होगी.
तब पांचजन्य ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था...सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट और सरकारी जमीनों पर 21 पक्के और 153 कच्चे मकान बने थे. मरीन पुलिस के आसपास के क्षेत्रों में सरकारी सर्वे नंबर 1852 में जमीनों पर कब्जा मिला था. इस बार कार्रवाई से पहले भी प्रशासन ने जमीनों का सर्वे करवाया, जिसके बाद कलेक्टर ने बुलडोजर का आदेश दिया. गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी खुद ये कह चुके हैं कि अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वो भी सोमनाथ मंदिर के पास अवैध निर्माण, जहां पीएम मोदी खुद कई बार दर्शन के लिए गए हैं, जिस मंदिर को लेकर हिंदुओं में बड़ी आस्था है.
वहां आसपास अवैध निर्माण का मकसद क्या है, ये प्रशासन को पता करना चाहिए, ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ सोमनाथ मंदिर के आसपास ही हो रहा है, बल्कि इससे पहले मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास से भी ऐसी ख़बरें आई थी, तब ये पता चला था कि रेलवे लाइन की जमीन पर कब्जा कर कुछ लोग मंदिर के नजदीक बस्तियां बसा चुके हैं, और आब खाली नहीं करवाना चाहते, लेकिन बुलडोजर ने विरोध के बावजूद सरकारी जमीन को खाली करवाया. ग्लोबल भारत टीवी के संवाददाता अभिषेक शांडिल्य ने जब ग्राउंड जीरो पर जाकर हालात देखे तो लोगों ने कैमरे पर हैरान करने वाली बातें बताई थी.
ऐसे में एक सवाल ये भी है कि क्या किसी प्लानिंग के तहत सरकारी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, और इस कब्जे के खेल का कोई आका भी है, जिसके चक्कर में गरीबों की झोपड़ियां उजड़ रही हैं. या फिर जानबूझकर ऐसी अवैध बस्तियां बसाई जा रही हैं. बुलडोजर से ज्यादा बड़ा सवाल इसकी गहन जांच का भी है.