महाकुंभ में सीएम योगी ने संगम स्नान किया, ये तस्वीरें सबने देखी, वो अपने मंत्रियों के साथ मस्ती-मजाक करते भी दिखे, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने संगम में तीन ही डूबकी क्यों लगाई, 5,, 7 या 11 क्यों नहीं, क्या इसके पीछे का रहस्य आपको पता है, क्या योगी संत हैं, इसलिए तीन डूबकी लगाई, अगर ऐसा था तो फिर बाकी मंत्रियों को ज्यादा डूबकी लगानी चाहिए, आखिर इसके पीछे की वजह क्या है, ये समझने के लिए आपको ये तस्वीर देखनी होगी. जब योगी आदित्यनाथ पूरी कैबिनेट के साथ पहले नाव के ऊपर खड़े होकर संगम का विहंगम दृश्य देखते हैं, उसके बाद सब लोग संगम में उतरते हैं, जहां घेरा बनाए जवान खड़े होते हैं, चूंकि सुरक्षा व्यवस्था का मसला भी बड़ा था, इसलिए पानी के अंदर भी कमांडो मुस्तैद थे, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान आपको मुस्तैद नजर आ रहे हैं, कुछ लोग हाथों का घेरा बनाए खड़े थे, जहां से थोड़ी दूरी पर योगी पहुंचते हैं, तभी एक व्यक्ति कहता है इससे आगे नहीं जाना चाहिए.

ये ठीक वैसा ही था, जैसे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कुछ दिन पहले संगम में डूबकी लगाने गए, तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी ने उन्हें रोका और कहा यहीं स्नान कर लीजिए, आगे मत जाइए, हाथों के इशारों से ये बात साफ समझ आ रही थी, शायद इसीलिए गहरे पानी में जाने की बजाय योगी आदित्यनाथ ने कमर पर पानी में स्नान कर लिया, अपने मंत्रियों के साथ हंसी-मजाक करते भी नजर आए, जिस तस्वीर पर कई लोग सवाल भी उठा रहे हैं कि गंगा स्नान के दौरान कम से कम ऐसा नहीं करना चाहिए, हालांकि उससे पहले कैबिनेट बैठक कर 10 बड़े फैसलों पर मुहर भी लगाई थी, लेकिन तीन ही डूबकी क्यों लगाई, और 22 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी, जब बैठक 21 जनवरी को होनी थी तो उसे 24 घंटे आगे क्यों कर दिया गया, जरा ये भी समझिए.

जिस तिथि को सीएम योगी ने स्नान किया, वो है माघ महीने की अष्टमी तिथि, वैसे तो महाकुंभ में हर तिथि का खास महत्व है, आप किसी दिन गंगा स्नान कर सकते हैं, लेकिन अष्टमी तिथि की खास प्रधानता है, कहते हैं इस दिन गंगा नदी में अगर 3, 5 या 11 डूबकी लगा लें, सारी मनोकामना पूरी हो जाती है, नदियों में डूबकी लगाने के पीछे भी एक गणित काम करता है, कहा जाता है

जब आप तीन डुबकियां लगाते हैं, तो इनका संबंध तीन लोकों और भूत, भविष्य, वर्तमान से जोड़ा जाता है. हिंदू धर्म में तीन बार डुबकी लगाना त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और त्रिमूर्ति (सृष्टि, पालन, संहार) का प्रतीक है. यह आत्मा, मन और शरीर की शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है. पहली डुबकी शरीर की शुद्धि और बाहरी अशुद्धियों को दूर करने के लिए होती है. दूसरी डुबकी मन की शुद्धि और मानसिक अशांति को शांत करने के लिए होती है. तीसरी डुबकी आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति की कामना के लिए होती है. जब आप 5 डुबकी लगाते हैं, तो उसमें से तीन डुबकी त्रिदेवों को, एक डुबकी इष्ट देव को और एक डुबकी अपने पूर्वजों को समर्पित करें.

ये जानकारी इसलिए भी जरूरी है, ताकि आप महाकुंभ जाएं तो जाने-अनजाने में ऐसे ही डूबकी लगाकर नहीं लौट आएं, बल्कि उसके पीछे की कहानी समझें. सीएम योगी ने तीन डूबकी लगाई, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो वो 5, 11 और 51 डूबकियां लगाते हैं, हालांकि बदलते दौर में इन बातों को लोग भूलते जा रहे हैं, यहां तक कि अखिलेश यादव ट्वीट कर लिखते हैं त्रिवेणी को करें प्रणाम, और रखें नहान का मान, आप अखिलेश की इस बात पर क्या कहेंगे, कमेंट कर बताएं.,