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नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इन दिनों किस मिशन पर हैं, वो अचानक से एक दिन दिल्ली से कोलकाता पहुंचते हैं, वहां बंगाल के खुफिया अधिकारियों को तलब करते हैं, नॉर्थ ईस्ट के अधिकारी भी बुलाए जाते हैं, और एक सीक्रेट मीटिंग होती है. बंद कमरे की बैठक में क्या-क्या बातें होती हैं, क्या-क्या आदेश दिए जाते हैं, इसकी कहानी अब एक हफ्ते बाद सामने आई है, जिसे सुनकर ये साफ कहा जा रहा है बंगाल और बांग्लादेश दोनों जगहों पर कुछ बड़ा होने वाला है, लेकिन सवाल ये भी उठता है कि जब डोभाल खुद वहां के अधिकारियों को दिल्ली बुलाकर रिपोर्ट ले सकते हैं तो बंगाल क्यों गए, जानकार बताते हैं डोभाल हमेशा ग्राउंड पर जाकर हालात का जायजा लेते हैं. चाहे दिल्ली हो या कश्मीर, अब बंगाल पर नजर इसलिए है, क्योंकि बांग्लादेश से पाकिस्तान भारत के खिलाफ बड़ी गतिविधियां चला रही है, और पश्चिम बंगाल में देश के कुछ दुश्मन बैठे हो सकते हैं.
इसीलिए डोभाल ने जो मीटिंग की उसमें कई बड़े आदेश दिए. सूत्र बताते हैं डोभाल ने मीटिंग में कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के प्रमुख ने एक महीने के भीतर दो बार बांग्लादेश का दौरा किया. बांग्लादेश के चटगांव में एक हफ्ते तक पाकिस्तान क्या कर रहा था, उसे लेकर सतर्क रहना होगा. पश्चिम बंगाल के गैर मान्यता प्राप्त मदरसे जो खासकर बीरभूम, मालदा, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जिले में हैं, उन पर खास नजर रखना होगा. ये दुश्मनों को मदद पहुंचा सकते हैं. पश्चिम बंगाल और असम से जो जैश ए मोहम्मद और ABT के 19 गुर्गे पकड़े गए हैं, उनकी तह तक जाना होगा. हमें हर हाल में दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देना है.
डोभाल की इस मीटिंग के बाद बंगाल में एक्शन शुरू हो चुका है, उन लोगों की तलाश की जा रही है, जो रहते बंगाल में हैं, पर काम पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए करते हैं, चाहे वो नोटों के तस्कर हों या फिर पाकिस्तान में बैठे आकाओं के साथी, जो भी बांग्लादेश बॉर्डर से हिंदुस्तान की सरजमीं पर अवैध तरीके से कदम रखने की कोशिश कर रहा है, उससे बीएसएफ के जवान सख्ती से निपट रहे हैं.
1 मार्च को ऐसी ही घटना त्रिपुरा-बांग्लादेश बॉर्डर पर हुई, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 20-25 बांग्लादेशी तस्करों ने हिंदुस्तान की सीमा में घुसने की कोशिश की, जब बीएसएफ ने उन्हें रोका तो गोलीबारी करने लगे, जवाबी कार्रवाई में एक तस्कर ढेर हो गया. जबकि एक जवान भी घायल हुआ है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. त्रिपुरा से लेकर बंगाल तक जिन-जिन राज्यों से बांग्लादेश की सीमा मिलती है, उस 4 हजार 96 किलोमीटर वाले इलाके पर बीएसएफ ने सख्ती बढ़ा दी है. दिल्ली से साफ आदेश है बॉर्डर पर किसी भी तरह की चूक नहीं होनी चाहिए, जो जिस भाषा में समझे उसे उसी की भाषा में जवाब दो.
लेकिन डोभाल का ये दौरा सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बल्कि सियासत से भी जुड़ा बताया जा रहा है. अगले साल बंगाल में विधानसभा चुनाव होना है, और ममता बनर्जी पर ये आरोप बराबर लगते रहे हैं कि वो घुसपैठियों की मदद से चुनाव जीतती हैं. रोहिंग्या-बांग्लादेशियों को बंगाल में उनकी सरकार बढ़ाव दे रही है, ऐसे में डोभाल का वहां जाना, सीक्रेट मीटिंग करना और फिर कुछ जिलों पर खास ध्यान देने के आदेश देना, साफ इशारा करता है घुसपैठियों की कमर टूटने वाली है, उनके आकाओं को सजा होने वाली है, और अगर ममता बनर्जी की पार्टी के नेता उनके मददगार निकले तो फिर बंगाल में बड़ा एक्शन हो सकता है.
इसका असर 2026 में होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव पर भी देखने को मिल सकता है. राजनीतिक जानकार कहते हैं केजरीवाल की तरह ममता बनर्जी का भी किला इस बार हिलने वाला है, जिसकी तैयारी बीजेपी ने कर ली है. लेकिन सियासत का मसला अलग और सुरक्षा का मसल अलग है, इसीलिए डोभाल के दौरे को भले ही कुछ लोग सियासत से जोड़कर देखें पर देश की सुरक्षा के लिहाज से ये सीक्रेट मीटिंग बेहद अहम थी.