12 अक्टूबर को जब पूरा देश दशहरे का त्यौहार मना रहा होगा, तो विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे होंगे, 15 और 16 अक्टूबर को वो पाकिस्तान में रहेंगे, पर क्यों रहेंगे, इसके पीछे की कहानी थोड़ी तफसील से समझनी होगी, और जब जयशंकर जा रहे हैं तो क्या पीओके पर कोई बड़ी बातचीत होने वाली है, ये भी समझते हैं, पर उससे पहले जानिए जयशंकर का सुरक्षा घेरा, दुश्मन मुल्क में कैसा होने वाला है.
जयशंकर जिस सुरक्षा घेरे में अभी चलते हैं, उसमें 22 सिक्योरिटी कमांडोज होते हैं, जिसमें 5-6 एनएसजी कमांडोज, और बाकी सीआरपीएफ और दिल्ली के जवान होते हैं. लेकिन जयशंकर चूंकि पाकिस्तान जाने वाले हैं, जहां खतरा बड़ा हो सकता है, इसलिए गृह मंत्रालय इनकी सुरक्षा अपग्रेड कर सकता है और एसपीजी कमांडो भी इनकी सुरक्षा में मुस्तैद हो सकता है.
यह भी पढ़ेंः जो काम 37 विदेश मंत्री नहीं कर पाए वो जयशंकर ने 37 सेकेंड में कर दिखाया!
हालांकि पाकिस्तान खुद भी नहीं चाहेगा कि वहां किसी तरह की कोई परेशानी हो, क्योंकि इस्लामाबाद में जयशंकर के अलावा चीन, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, पाकिस्तान, रूस, उज़्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान सरकार के मुखिया भी होंगे, इसलिए अभी से ही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और वहां की सेना के होश उड़े हुए हैं, उन्हें हर हाल में दुनिया को ये दिखाना है कि हमारे यहां भी दुनिया की बड़ी से बड़ी मीटिंग शांतिपूर्वक संपन्न हो सकती है. पर सवाल ये है कि पाकिस्तान ऐसा दुनिया को दिखाना क्यों चाहता है, और जयशंकर ने 800 दिन में ऐसा क्या किया कि वो घुटनों पर आ गया. क्योंकि जयशंकर अगर पाकिस्तान जा रहे हैं, तो अपनी तीन शर्तों पर जा रहे हैं.
क्योंकि ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने भारत के दुश्मन नंबर 1 जाकिर नाइक को शरण दी है, जिस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल कहते हैं हम आश्चर्यचकित नहीं हैं. लेकिन सवाल ये है कि आखिर जयशंकर पाकिस्तान जाने को तैयार क्यों हुए, क्योंकि कुछ दिनों पहले ही जब मोदी का विमान पाकिस्तान के आसमान में 45 मिनट रहा था तो कई तरह की चर्चाएं उठी थीं. यहां तक कि पाकिस्तान ने फिर मोदी को न्यौता भी भेजा था, लेकिन मोदी ने कह दिया, हम पाकिस्तान नहीं आएंगे, और अब उसी मीटिंग में जयशंकर जाने के लिए तैयार हुए हैं, ऐसा 9 साल बाद पहली बार होगा जब कोई भारतीय नेता पाकिस्तान जाएगा, इससे पहले खुद मोदी पीएम बनने के बाद शरीफ से मिलने गए थे, और उसके बाद सुषमा स्वराज पाकिस्तान दौरे पर गईं थीं, लेकिन उसके बाद सारी बातचीत कम हो गईं, जिसके बाद ये समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर 800 दिनों में जयशंकर ने ऐसा क्या किया कि पाकिस्तान घुटनों पर आ गया.
यह भी पढ़ेंः 30 साल की वो लड़की कौन है, जिसने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को बुरी तरह धोया!
800 दिन में घुटनों पर कैसे आया पाकिस्तान
दोनों एक फीट की दूरी पर थे, लेकिन बातचीत नहीं हुई, साल 2023 में बिलावल भुट्टो को बात करने आखिर हिंदुस्तान आना पड़ा, गोवा में हुई SCO समिट में जब बिलावल ने हिस्सा लिया, तब लगा कि पाकिस्तान अब सरेंडर कर चुका है, और अब जयशंकर जब वहां जाएंगे तो पीओके पर क्या बात होगी, इस पर सबकी निगाहें हैं, क्योंकि बिलावल ने हिंदुस्तान में आकर ये तो कहा था कि जम्मू-कश्मीर से भारत ने 370 हटाकर ठीक नहीं किया, अब जयशंकर उसका जवाब इस्लामाबाद की धरती से क्या देंगे, इसका इंतजार समूचे हिंदुस्तान को है. लेकिन एक हिंदुस्तानी होने के नाते आप अपनी राय बताइए कि जयशंकर को पाकिस्तान दौरे पर जाना चाहिए या नहीं.