साउथ में रैली से ठीक पहले इन गायों की तस्वीर शेयर कर कैसे चला मास्टरस्ट्रोक,40 सीटों पर जीत हो गई पक्की!

Global Bharat 18 Jan 2024 3 Mins
साउथ में रैली से ठीक पहले इन गायों की तस्वीर शेयर कर कैसे चला मास्टरस्ट्रोक,40 सीटों पर जीत हो गई पक्की!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गायों के साथ वाली तस्वीर आपने भी देखी होगी, जिसमें वो गायों को हरा चारा खिलाते नजर आ रहे हैं, लेकिन ये जो गायें हैं, ये कितना दूध देती हैं, इनकी धार्मिक मान्यता क्या है और मोदी के अनुष्ठान से इनका क्या संबंध है, इन गायों के साहरे मोदी ने कैसे 40 सीटों पर बीजेपी की जीत पक्की कर दी है, सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे. लेकिन वो बताएं उससे पहले पीएम मोदी की ये तस्वीर देखिए.


16 जनवरी को पीएम मोदी जहां दर्शन करने पहुंचे, ये देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां का एक भारी खंभा हवा में लटका हुआ है, पर जयपुर वाले हवा महल की तरह नहीं, बल्कि इस खंभे के पीछे दैवीय शक्ति बताई जाती है. वीरभद्र मंदिर के नाम से प्रचलित ये मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के एक छोटे से गांव लेपाक्षी में है, जहां कुल 70 पिलर हैं, लेकिन एक पिलर जमीन से करीब आधा फीट उठा हुआ है, इसीलिए इसे आकाश स्तंभ भी कहते हैं. पर पीएम मोदी आकाश स्तंभ देखने नहीं गए थे, बल्कि वो इस मंदिर में 11 दिनों की अनुष्ठान की वजह से गए थे. क्योंकि इसी जगह पर माता सीता को ले जा रहे रावण को जटायु ने रोकने की कोशिश की थी. इसलिए रामायण में भी इस जगह की अद्भूत मान्यता है. और पीएम मोदी राम मंदिर उद्घाटन को लेकर हर परंपरा का पालन कर रहे हैं, इसलिए इस मंदिर में जाना और उससे पहले गायों को चारा खिलाना खास माना जा रहा है. जिन गायों के पीएम मोदी ने चारा खिलाया है, उनका नाम है, पुंगनूर गाय, जो आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पाई जाती हैं.

पुंगनूर गायों की खासियत
खास बात ये है कि ये काफी कम चारा खाती हैं, सिर्फ 5 किलो चारे में ही इनका एक दिन का गुजारा हो जाता है. 100-200 किलो वजन वाली ये गायें सिर्फ डेढ़ से दो किलो तक ही दूध देती हैं, इसलिए किसानों ने इन्हें पालना ही छोड़ दिया. कभी इन गायों की संख्या 13 हजार थी, पर एक वक्त में सिर्फ 200 हो गई थी, जिसे देखकर पीएम मोदी ने एक विशेष अभियान चलाया. प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद ही इनके संरक्षण के लिए मिशन गोकुल चलाया, उसके बाद आंध्र प्रदेश की सरकार ने मिशन पुंगनूर चलाकर कमाल कर दिया. क्योंकि इन गायों की धार्मिक और औषधीय मान्यता भी खूब है. इनके गोबर और गोमूत्र से कई तरह की दवाइयां बनती हैं, दक्षिण भारत के लोगों का मानना है कि इन गायों में महालक्ष्मी का वास होता है. विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी समेत दक्षिण भारत के कई मंदिरों में भोग और क्षीर अभिषेक के लिए पुंगनूर गाय के दूध का ही इस्तेमाल होता है. इसलिए जब पीएम मोदी ने इन गायों की तस्वीर पोस्ट की तो ऐसी चर्चा छिड़ गई कि

राम मंदिर उद्घाटन के सहारे मोदी दक्षिण भारत को भी साधने की कोशिश में हैं.
दक्षिण भारत के 6 राज्यों में कुल 130 लोकसभा सीटें हैं. जिसमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना की सीटें शामिल हैं. तेलंगाना को बीजेपी ने पहले ही साध लिया है, कर्नाटक में पहले से पकड़ मजबूत है. जबकि आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडू में पार्टी की पकड़ को मजबूत करना है, इसीलिए मोदी ने चुनाव से ठीक पहले आंध्र प्रदेश और केरल को चुना.

BJP को मिलने वाला है बंपर फायदा
दो दिनों के दौरे में ही 4 हजार करोड़ की योजनाओं की सौगात देने का सियासी कनेक्शन समझकर हर कोई यही कह रहा है कि इस चुनाव बीजेपी को दक्षिण भारत से बंपर फायदा मिलने वाला है. खुद मोदी के भी दक्षिण भारत से चुनाव लड़ने की चर्चा है, क्योंकि इस बार बीजेपी का फोकस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि सत्ता में आना है, बल्कि बीजेपी का फोकस इस बात पर है कि इस बार 400 से ज्यादा सीटें लानी है, और उसके लिए दक्षिण भारत को साधना होगा क्योंकि साउथ ही कांग्रेस के लिए अब संजीवनी बची है, जो खत्म हुई तो कांग्रेस मुक्त भारत का सपना भी शायद इस चुनाव में साकार हो जाए.

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