गुजरात की जेल में लॉरेंस बिश्नोई 9 दिन का उपवास रखता है, वो इस दौरान अन्न नहीं खाता, किसी से बात नहीं करता, पूरी तरह मौन व्रत रखता है. ये दावा जब सूत्रों के हवाले से सामने आता है और दसवें दिन मुंबई में बाबा सिद्दीकी जैसे बड़ा नेता का हाल मूसेवाला की तरह हो जाता है, तो कई तरह के सवाल खड़े होने लगते हैं. सवाल ये भी है कि लॉरेंस ने आखिर ऐसा किया क्यों, क्या बाबा सिद्दीकी की सलमान से करीबी थी, इसलिए इस घटना को अंजाम दिलवाया या फिर वजह इससे भी बड़ी है. लॉरेंस ने वो वीडियो कॉल किसे किया था, जिसके कुछ दिन बाद इस घटना को अंजाम दिया गया, आरोपियों ने पूछताछ में ऐसा क्या बताया, जिसे सुनकर मुंबई पुलिस भी हिल गई, ये बताएं उससे पहले विस्तार से सुनिए पूरा मामला क्या है.
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी के बड़े नेता बाबा सिद्दीकी पर हमला होता है, वो अपने बेटे जीशान सिद्दीकी के ऑफिस के बाहर पटाखा फोड़ रहे होते हैं, तभी ऑटो-रिक्शा से तीन लड़के उतरते हैं, उनके मुंह पर रूमाल बंधा होता है, और दनादन फायरिंग कर फरार हो जाते हैं, जिनमें से दो को पुलिस पकड़ती है, एक आरोपी फरार हो जाता है. आनन-फानन में बाबा सिद्दीकी को लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाता है, सबसे पहले अभिनेता संजय दत्त अस्पताल पहुंचते हैं, उसके बाद सलमान खान की रोते हुए अस्पताल पहुंचने की तस्वीरें आती है, जिसे देखकर हर कोई यही पूछता है कि आखिर सलमान का बाबा सिद्दीकी से ऐसा क्या नाता था.
कहा जाता है बाबा सिद्दीकी का परिचय सबसे पहले सुनील दत्त से हुआ, जो कांग्रेस के बड़े नेता हुआ करते थे, सुनील दत्त ने ही इनकी मुलाकात अपने बेटे संजय दत्त से करवाई और फिर संजय दत्त ने बाबा सिद्दीकी को सलमान और शाहरूख जैसे सितारों से मिलवाया, इसीलिए जब बाद में सलमान-शाहरूख की दोस्ती में दरार आई तो एक इफ्तार पार्टी में बुलाकार बाबा सिद्दीकी ने दोनों की दुश्मनी खत्म करवाई. और घटना के बाद यही दावा किया जा रहा है कि सलमान से करीबी होने की कीमत इनको जान गंवाकर चुकानी पड़ी, क्योंकि लॉरेंस के करीबी रोहित गोदारा ने कहा था जो भी सलमान का दुश्मन है, वो मेरा भी दुश्मन है.
सूत्र बताते हैं आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है कि हमें लॉरेंस बिश्नोई बॉस ने भेजा था. हमें खर्चों के लिए 50-50 हजार रुपये दिए गए थे, मुंबई के कुर्ला इलाके में बीते 25-30 से हमलोग रह रहे थे. कई बार बाबा सिद्दीकी के बेटे के ऑफिस की रेकी की, उसके बाद दशहरे के दिन पटाखे के शोर में इस घटना को अंजाम देने का प्लान बनाया.
मुंबई पुलिस का दावा है कि ये कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का मामला है, पहले बाबा सिद्दीकी को धमकी भी मिली थी, ऐसी ख़बरें सामने आई है, जिसके बाद उन्हें वाई कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी, ऐसे में सवाल ये भी है कि आखिर वो सुरक्षाकर्मी उस वक्त कहां थे, जब बाबा सिद्दीकी अपने बेटे जिशान के ऑफिस के बाहर पटाखा फोड़ रहे थे. फिलहाल मुंबई पुलिस की 15 अलग-अलग टीमें अलग-अलग एंगल से मामले की जांच कर रही है.