नई दिल्ली: उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकासनगर इलाके में 28 जनवरी 2026 को एक विवादास्पद घटना हुई, जिसमें दो कश्मीरी युवक भाइयों - दानिश (18 वर्ष) और ताविश (17 वर्ष) - के साथ मारपीट की गई. ये भाई जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा से हैं और हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में रहते हुए सर्दियों में फेरी लगाकर शॉल, सूट और अन्य ऊनी कपड़े बेचते हैं.
घटना डाकपत्थर रोड पर एक दुकान के सामने हुई, जहां दोनों भाई नमकीन या कुछ सामान खरीदने गए थे. पीड़ित दानिश की शिकायत के अनुसार, दुकानदार संजय यादव ने पहले उनका नाम-पता और भाषा पूछी. कश्मीरी होने और मुस्लिम पहचान जानने के बाद जातिसूचक गालियां दीं, धार्मिक टिप्पणियां कीं और फिर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. हमले में कुछ अन्य लोग भी शामिल हुए. ताविश को सिर पर गंभीर चोट आई (कई टांके लगे) और हाथ में फ्रैक्चर हुआ, जबकि दानिश को भी चोटें आईं.
इस शिकायत पर विकासनगर पुलिस ने संजय यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया. शुक्रवार (30 जनवरी) को अदालत में पेश करने के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की, जिसमें सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान शामिल हैं.
दुकानदार की पत्नी का गंभीर आरोप
दूसरी ओर, अब दुकानदार संजय यादव की पत्नी ने भी विकासनगर कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. महिला का आरोप है कि दोनों कश्मीरी युवक उनकी दुकान पर आए थे और सामान खरीदने के बहाने अभद्र व्यवहार किया - गंदे इशारे किए, हाथ पकड़ा और अपनी ओर खींचने की कोशिश की. विरोध करने पर विवाद बढ़ा और उनके पति ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे मारपीट हुई. महिला ने साफ कहा कि वे 30 साल से अधिक समय से दुकान चला रही हैं और कभी किसी से धर्म या जाति नहीं पूछतीं, बस व्यापार करती हैं. उन्होंने कश्मीरी युवकों के दावे को खारिज किया कि पहले उनकी पहचान पूछी गई थी.
दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच जारी
पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच चल रही है. मामले में सांप्रदायिक रंग और अभद्रता के आरोपों की गहराई से पड़ताल की जा रही है. कुछ रिपोर्टों में पुलिस ने इसे 'गलतफहमी' से उपजा विवाद बताया है, जबकि पीड़ित पक्ष और कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक आधार पर हमला करार दिया है. जांच के नतीजे पर आगे की कार्रवाई होगी. यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और जम्मू-कश्मीर के नेताओं व संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है. पुलिस निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है.