नई दिल्ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ्स को अवैध घोषित कर दिया, जो भारत सहित कई देशों से निर्यात पर लगाए गए थे. इससे बड़ा सवाल उठता है कि क्या भारतीय निर्यातकों को कोई रिफंड या राहत मिलेगी? हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा राष्ट्रीय आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ्स को रद्द कर दिया, लेकिन फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उच्च दरों पर भुगतान किए गए पैसे वापस करने होंगे या नहीं.
रॉयटर्स के अनुसार, 6-3 के विभाजित फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का हवाला देकर व्यापक आयात कर लगाने में अपनी अधिकारिता का उल्लंघन किया. सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से कंपनियां अरबों डॉलर के रिफंड की मांग करेंगी. कंपनियों ने कुल मिलाकर अमेरिकी सरकार को टैरिफ्स के रूप में अरबों डॉलर का भुगतान किया है.
एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि कई कंपनियां, जैसे वेयरहाउस चेन कॉस्टको, पहले से ही अदालत में रिफंड के लिए लाइन में लग चुकी हैं. असहमति जताने वाले जज ब्रेट कवानॉ ने कहा कि रिफंड प्रक्रिया जटिल हो सकती है. असहमति नोट में जस्टिस कवानॉ ने लिखा, "कोर्ट आज कुछ नहीं कह रहा कि सरकार को आयातकों से एकत्रित अरबों डॉलर वापस करने चाहिए या नहीं, और अगर हां तो कैसे. लेकिन मौखिक बहस में स्वीकार किया गया था कि यह प्रक्रिया एक 'गड़बड़' (mess) होगी."
क्या भारतीय निर्यातकों को अमेरिका से कोई रिफंड मिलेगा?
भारत उन पहले देशों में शामिल था जो ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल 2025 को घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ्स से प्रभावित हुए. रूसी तेल खरीदने के लिए दंडात्मक टैरिफ्स लगाए गए, जिससे दर 50% तक पहुंच गई, जो किसी भी देश के लिए सबसे ऊंची थी. इस साल जनवरी में ही ट्रंप ने घोषणा की कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के अंतिम रूप लेने पर टैरिफ्स को 18% तक कम कर दिया जाएगा.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप के टैरिफ्स के खिलाफ फैसले का भारतीय निर्यातकों पर क्या असर होगा? जवाब यह है कि टैरिफ्स का भुगतान निर्यातकों ने नहीं, बल्कि आयातकों ने किया. बढ़ी हुई लागत अमेरिकी ग्राहकों पर ही डाली गई, जिससे महंगाई बढ़ी. न्यूयॉर्क स्थित विदेश नीति विशेषज्ञ डैनियल ब्लॉक ने बताया "टैरिफ्स अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे नहीं थे क्योंकि वे महंगाई को बढ़ावा दे रहे थे." निर्यातकों, जिसमें भारतीय भी शामिल हैं, को नुकसान हुआ क्योंकि भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी नहीं रह गए. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है.
भारतीय कंपनियों के लिए रिफंड पर विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सीएनबीसी के अनुसार, व्यापार वकीलों ने चेतावनी दी है कि टैरिफ रिफंड में देरी हो सकती है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी अदालतें कैसे फैसला करती हैं और यूएस कस्टम्स भुगतान कैसे जारी करती हैं. इसके अलावा, आयातकों के अरबों डॉलर कस्टम बॉन्ड और कोलेटरल में फंसे हुए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में भारतीय निर्यातकों को उच्च टैरिफ्स से हुए नुकसान की भरपाई करने का कोई तंत्र नहीं है. उन निवेशों की भरपाई भी नहीं हो सकती जो टैरिफ शॉक कम करने के लिए किए गए थे, अब जब कुछ महीनों बाद चार्जेस हट गए हैं.
चूंकि टैरिफ्स का बिल आयातकों ने भरा, इसलिए अगर रिफंड होता भी है तो वह यूएस आयातकों को जाएगा. यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन की प्रक्रिया के माध्यम से, जिसकी निगरानी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड करती है. अर्थशास्त्रियों ने बताया था कि संभावित रिफंड की राशि अरबों में होगी. हालांकि, फैसले में स्वचालित रिफंड का आदेश नहीं दिया गया और प्रक्रिया में क्लेम दाखिल करना, उसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया शामिल हो सकती है. फिर भी, भारतीय निर्यातक अब फायदा उठा सकते हैं अगर अमेरिकी आयातक कम लागत पास ऑन करें या कीमतों में समायोजन मांगें.
क्या टैरिफ फैसला भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में मदद करेगा?
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अभी साइन नहीं हुआ है, और अचानक ट्रंप प्रशासन के लिए टैरिफ्स टेबल से हट गए. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने बताया कि टैरिफ्स के फैसले से भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की दोबारा जांच करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ्स हटने से भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का करीब 55% हिस्सा 18% ड्यूटी से मुक्त हो जाएगा, और केवल स्टैंडर्ड MFN टैरिफ्स लागू होंगे. इससे भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में ज्यादा जगह मिलेगी.
डैनियल ब्लॉक ने बताया कि ट्रंप प्रशासन के लिए टैरिफ लड़ाई को कांग्रेस या अदालतों में वापस ले जाना थकाऊ प्रक्रिया होगी. उन्होंने कहा कि यह ट्रंप के लिए बड़ा झटका है... वह टैरिफ्स पर आसानी से नहीं मानेगा. यह उनकी स्टाइल नहीं है. इसलिए, जबकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारतीयों के लिए ज्यादातर रिफंड नहीं दिलाएगा, लेकिन निर्यातकों को फायदा होगा क्योंकि उनके उत्पाद प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे. अगर कोई भारतीय कंपनी अमेरिका में आयात करती है, तो रिफंड का रास्ता लंबा और अनिश्चित होगा क्योंकि यह नया क्षेत्र है.