उधर बंगाल में सुवेंदु कहते हैं मुझे डराओ नहीं, मैं डरने वाला नहीं, हिमंता की रफ्तार भी तेज़, राजनीति में छिड़ी चर्चा, योगी, हिमंता या अधिकारी कौन सबसे बेस्ट CM ?

Global Bharat 19 May 2026 08:38: PM 3 Mins
उधर बंगाल में सुवेंदु कहते हैं मुझे डराओ नहीं, मैं डरने वाला नहीं, हिमंता की रफ्तार भी तेज़, राजनीति में छिड़ी चर्चा, योगी, हिमंता या अधिकारी कौन सबसे बेस्ट CM ?

बंगाल में क्या हो रहा है उसके पहले आप देखिए UP में क्या-क्या हो गया? यूपी पहले कैसा था? और योगी ने कैसे उसे बदल दिया? सुवेंदु की रफ्तार क्या योगी से ज्यादा तेज़ है? हम इसका भी आंकलन करते हैं! 2017 में CM शपथ लेते हैं, मदरसों में राष्ट्रगान अनिवार्य करते हैं, 2021 में हिमंता शपथ लेते हैं, मदरसों की लिस्ट निकालते हैं, 1200 से ज्यादा मदरसों पर बुलडोज़र कार्रवाई करते हैं, सुवेंदु अधिकारी ने अब तक मदरसे को लेकर कोई ख़ास निर्णय नहीं किया है! हालांकि बंगाल में सभी जगहों पर राष्ट्रगान को अनिवार्य कर दिया है! योगी 2017 में ही महिलाओं को छेड़ने वाले मनचलों को सही करने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन करते हैं, 2022 आते-आते योगी ने यमराज का जिक्र किया, नारा दिया अगर किसी ने छेड़ा तो सीधे ऊपर से मेल! यानी योगी का स्टाइल और राजनीतिक लहजा एकदम क्लियर है, जो कहते हैं वो करते हैं,

17 हज़ार एनकाउंटर हुए, 300 करीब ढेर हुए, 34 हज़ार बदमाश पकड़े गए, जबकि बंगाल में महिलाओं को लेकर अभी कोई ऐसा मॉडल लागू नहीं हुआ! हिमंता की सरकार में भी महिलाओं को छेड़ने वालों के लिए यमराज मॉडल नहीं आया! 2020 यानी योगी के तीन साल हो चुके थे, पहली बार राजनीति में बुलडोज़र नीति आई! विकास दुबे के अंत के साथ माफियाओं को मिट्टी में मिलाने का शंखनाद किया, वो सिलसिला अब भी चल रहा है, बंगाल में सुवेंदु CM बनते ही बुलडोज़र नीति पर शिफ्ट हुए, हिमंता भी योगी से ठीक 3 साल बाद बुलडोज़र नीति लेकर आए और मदरसों पर कहर बरपाया, यानी योगी आदित्यनाथ जो मॉडल बना रहे हैं वही बंगाल और असम में लागू हो रहा है!

इसके कई और उदाहरण हैं! बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को भगाने के मॉडल में भी योगी ने ही लीड लिया! यूपी के कई शहरों में डिटेंशन सेंटर बनाए, और पुलिस के ज़रिए सबको चिन्हित करवाया! असम में हिमंता की सरकार ने योगी से भी बेहतर घुसपैठियों पर काम किया है! सुवेंदु ने हिमंता के मॉडल पर ही एक चुनौती बंगाल में सीएम बनने के बाद दी... 

सबसे बड़ी बात, यूपी दो नीतियों पर सरकार शिफ्ट हुई, नीति नंबर एक: माफियाओं, अपराधियों, मनचलों और बिगड़ैल लोगों को सुधारा जाएगा, दूसरी नीति: अपराध का नाम मिटाकर विकास का रास्ता भी खोला जाएगा, क्या बंगाल में सुवेंदु ये कर पाएंगे, इसके लिए पांच साल रुकना होगा, इस मॉडल में हिमंता भी नंबर दो पर आते हैं! हिमंता की डिमांड योगी के बाद आती है, इसका सबूत आपको चुनावी रैली में मिल सकता है, बीजेपी योगी को मैदान में उतारती है और वो 90 फीसदी स्ट्राइक रेट से जीत पार्टी को देते हैं! सुवेंदु ऐसा कर पाएंगे या नहीं ये भी वक्त तय करेगा!

योगी ने सत्ता और मठ दोनों को संभाला, राष्ट्र और सनातन को आगे रखा, विकास के लिए अपराधियों को तोड़ा!
कोविड जैसी आपदा हो या फिर महाकुंभ जैसा भव्य आयोजन, हर बार योगी ने अपने काम से सबका दिल जीता
बंगाल चुनाव में योगी के मॉडल को शाह ने लागू किया, गुंडों को सबक सिखाने का वादा ही सत्ता तक पहुंचाता है

यानी राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने जो लकीर यूपी में खींची वही असम में फॉलो की गई, अब सुवेंदु उसी रास्ते पर हैं जो योगी ने सालों पहले UP में तैयार किया था, कानून व्यवस्था के मामले में बीजेपी के इतिहास में योगी जैसा मॉडल नहीं दिखता है, हालांकि यूपी में कल्याण सिंह की सरकार के दौरान कानून व्यवस्था पर काम किया गया था, अपराधियों और माफियाओं को सबक सिखाया गया था, जिसमें श्रीप्रकाश शुक्ला जैसे अपराधियों को मिटाया गया था...अब बंगाल पर सबकी नज़रें हैं, कोई किसी के रास्ते पर चल सकता है, सियासत में हर किसी को बड़ा बनना होता है, बीजेपी की ये सेकेंड लाइन लीडरशिप है, जो बेहतर करेगा भविष्य में उसे दिल्ली की कुर्सी मिलेगी!

असली उत्तराधिकारी जनता तय करती है लेकिन राजनीतिक पंडित अभी तक योगी को पहला स्थान देते हैं, जबकि हिमंता के काम ने भी प्रभावित किया है, और सुवेंदु की शुरुआत ने सबका दिल जीता है....लेकिन योगी 9 साल में एक ऐसी लकीर खींच चुके हैं, जिसे छोटा करने में हो सकता है सुवेंदु को और ज्यादा वक्त लगे! क्योंकि योगी मठ से आए, सत्ता में बैठे, दिल में सनातन था, कुर्सी पर भगवा रखा और सरकार भी वैसी चलाई, जबकि सुवेंदु TMC से आए, भगवा पहनकर बीजेपी में CM बने! हिमंता भी कांग्रेस से आए, भगवा छवि बना पाए....

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