यूपी में ऐसा कौन सा सर्वे हुआ, जिसे देखते ही योगी 303 गांवों में अपना बुलडोजर भेजने वाले हैं, उस सर्वे रिपोर्ट में 303 गांवों को लेकर ऐसा क्या लिखा है, जिसे पढ़ते ही डोभाल तक के होश उड़ जाएंगे. 303 में से 116 गांवों की कहानी तो इतनी दंग करने वाली है कि जानकर कहेंगे बाबा यूपी को पाकिस्तान और बांग्लादेश बनने से बचा लो. हम जो आंकड़े आपको बताने जा रहे हैं, उसे देखकर हो सकता है आपको भी पहली नजर में यकीन न हो, पर कुछ सबूत भी आपको दिखाएंगे.
ये ऑर्गेनाइजर वेबसाइट का आर्टिकल है, जो साफ-साफ लिखता है बीते 10 साल में एक खास वर्ग की आबादी 32 फीसदी बढ़ी है. यानि राहुल से लेकर अखिलेश तक जो कहते हैं कि झूठ फैलाया जा रहा है, उसकी हकीकत कुछ और है. योगी सरकार ने जब बॉर्डर इलाके में बसे गांवों का सर्वे करवाया तो पता चला कि...
जिसका सीधा सा मतलब ये है कि एक बड़ा खेल चल रहा है, नेपाल में तो मस्जिद और मदरसे वालों की संख्या ज्यादा है नहीं, और बांग्लादेश या म्यांमार का बॉर्डर यूपी में कहीं से मिलता नहीं, तो फिर यूपी में एक खास वर्ग की आबादी इतनी तेजी से बढ़ कैसे रही है. क्या ये बात सच है कि प्रदेशभर के मौलाना लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए उकसा रहे हैं. इसी साल मई महीने में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की एक रिपोर्ट भी सामने आई थी, जिसमें साफ-साफ लिखा था भारत में 1950 से लेकर 2015 तक हिंदुओं की आबादी में 7.8% की गिरावट आई है, जबकि मुस्लिम की आबादी में 43.15% का इजाफा हुआ.
हालांकि ओवैसी इन दावों को गलत करार देते हैं, और कहते हैं इस देश में हमारे समुदाय की आबादी कभी सनातनियों से ज्यादा नहीं हो सकती, तो क्या इसीलिए पूरी प्लानिंग के तहत कुछ लोग आबादी बढ़ाने की साजिश रच रहे हैं, और बांग्लादेशियों-रोहिंग्याओं को नेपाल के रास्ते यूपी, असम और बाकी के राज्यों में बसाने की साजिश चल रही है. जो सर्वे यूपी में हुआ, एक वैसा ही सर्वे असम में भी करवाया गया, जिसमें पता चला कि धुबरी, करीमगंज, साउथ सलमारा- मनकाचर, जिले जो भारत- बांग्लादेश के 10 किलोमीटर के बॉर्डर इलाके में हैं, वहां एक तबके की आबादी 31.45 फीसदी बढ़ी है. साल 2018 में बॉर्डर इलाके में मदरसा और मस्जिदों की संख्या 1349 थी, जो कि अब 1688 पहुंच गई है.
राजस्थान, उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में भी यही समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. जिसका बेहतर इलाज सिर्फ सीएम योगी ही ढूंढ सकते हैं, और जबसे रायबरेली से फर्जी प्रमाणपत्र वाले आरोपी पकड़े गए हैं, जीशान का खेल खुला है, तबसे यूपी पुलिस गांव-गांव तक ये पता करने में जुटी है, कहां कितने फर्जी सर्टिफिकेट बने हैं. रायबरेली में तो हालत ये है कि ग्राम प्रधान खुद ही घर-घर जाकर पूछ रहे हैं, और जो ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव या अधिकारी इसमें शामिल मिला, उसके घर बुलडोजर कभी भी पहुंच सकता है. अब चूंकि नए सर्वे में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि बॉर्डर से लगते इलाके में प्लान तरीके से इन्हें बसाया जा रहा है, इनके कागजात बनाए जा रहे हैं, तो जाहिर सी बात है इस बार भारत-नेपाल बॉर्डर के पास बसे गांवों में सीएम योगी का बुलडोजर गरज सकता है, और इस बार सिर्फ बुलडोजर से काम नहीं चलने वाला, बल्कि देश के उन विभीषणों का भी हिसाब होगा, जो इस तरह का खेल रच रहे हैं, ऐसे लोगों को सजा क्या मिलनी चाहिए, कमेंट कर बता सकते हैं.