कोल्लम (केरल): केरल में अवैध घुसपैठ का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगभग 10,000 बांग्लादेशी नागरिक फर्जी आधार, पैन, वोटर आईडी और राशन कार्ड के सहारे भारतीय प्रवासी मजदूर बनकर आराम से रह रहे हैं. मात्र 700 रुपए में ये जाली दस्तावेज उपलब्ध हो रहे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं.
पुलिस ने कोल्लम जिले के कोट्टारक्करा में 10 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया. इनके पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट की प्रतियां बरामद हुईं, जिससे उनकी असलियत खुल गई. कई सालों से केरल में रह रहे इन लोगों ने स्थानीय पतों का इस्तेमाल कर पूरी तरह भारतीय पहचान बना ली थी.
घुसपैठ का पूरा नेटवर्क
जांच में पता चला कि ये लोग बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों के रास्ते भारत घुसते हैं. यहां शुरुआती फर्जी दस्तावेज बनवाकर केरल पहुंच जाते हैं. बेंगलुरु से संचालित एक बड़े माफिया नेटवर्क के जरिए उन्हें सटीक जाली दस्तावेज मुहैया कराए जा रहे हैं, जिन्हें देखकर असली-नकली का फर्क करना मुश्किल है.
एक हैरान करने वाला मामला मुगल खातून (या मुगल खांडल) का है. वह 13 साल पहले पश्चिम बंगाल के रास्ते केरल आई थी. “ममदास” नाम से फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाकर रह रही थी. उसने अपने कई रिश्तेदारों को भी केरल बुला लिया. गिरफ्तारी से दो महीने पहले वह बांग्लादेशी पासपोर्ट पर बच्चों के साथ बांग्लादेश भी घूमकर आई थी.
'चेन माइग्रेशन' का खतरा
पुलिस को आशंका है कि 'चेन माइग्रेशन' के तहत पहले आए बांग्लादेशी अपने रिश्तेदारों को भी बुला रहे हैं. केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियां इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से गंभीरता से ले रही हैं. जांच की जा रही है कि कहीं आपराधिक या राष्ट्रविरोधी तत्व भी इन फर्जी दस्तावेजों का फायदा तो नहीं उठा रहे.
स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल है. भाषाई अंतर के बावजूद लोग पुलिस को जानकारी देने से कतराते हैं. सख्ती बढ़ने के बाद कई बांग्लादेशी केरल छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और प्रवासी मजदूरों की संख्या में अचानक कमी देखी जा रही है. मातृभूमि की रिपोर्ट के आधार पर यह खुलासा हुआ है, जिसने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है.