नई दिल्ली: उत्तराखंड में 'ऑपरेशन कालनेमी' के तहत पुलिस ने फर्जी बाबाओं और धार्मिक धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है. इस अभियान में अब तक 14 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी निलेश आनंद भरणे ने बताया कि जुलाई से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 5,500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई है. इनमें से 1,182 पर कार्रवाई हुई और 14 को हिरासत में लिया गया. हरिद्वार में 2,704 लोगों की जांच के बाद तीन गिरफ्तार हुए, जबकि देहरादून में 922 लोगों की जांच में पांच लोग पकड़े गए. टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा, नैनीताल जैसे जिलों में भी यह अभियान जोर-शोर से चल रहा है.
गिरफ्तारियों में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक बांग्लादेशी नागरिक पिछले आठ सालों से सेलाकुई में 'अमित कुमार' नाम से बंगाली डॉक्टर बनकर रह रहा था. उसने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था. एक अन्य आरोपी, कश्मीर के अनंतनाग का इफराज अहमद लोलू, 'राज आहूजा' बनकर दिल्ली का अमीर व्यक्ति होने का ढोंग रच रहा था और महिलाओं को ठग रहा था.
'ऑपरेशन कालनेमी' का नाम रामायण के राक्षस कालनेमी से लिया गया है, जो साधु का वेश धरकर हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने से रोकना चाहता था. महाभारत में वह कंस के रूप में पुनर्जनन हुआ. पुलिस का कहना है कि यह अभियान उत्तराखंड की 'देवभूमि' की पवित्रता को बनाए रखने के लिए शुरू किया गया है.
पुलिस ने साफ किया कि फर्जी बाबाओं, धार्मिक धोखाधड़ी और गैरकानूनी रूपांतरण के खिलाफ यह कार्रवाई और तेज होगी. धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.