नई दिल्ली: एक तरफ राजा भैया की देख रेख में ठाकुर विधायकों की बैठक हुई, फिर एक ग्रुप बना, आगे भी बैठक होने वाली है...दूसरी तरफ योगी सरकार में सहयोगी दिल्ली में कोई लामबंदी कर रहे हैं? अखिलेश यादव का PDA दिन प्रतिदिन मज़बूत हो रहा है! दूसरी तरफ BJP के सहयोगियों ने प्रेशर पॉलटिक्स शुरू कर दी है! क्या ये अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ किसी बड़ी लड़ाई की तैयारी है? दो मिनट की रिपोर्ट को समझाता हूं.
दिल्ली में हुई BJP सहयोगियों की बैठक में कोई BJP का नेता नहीं पहुंचा! साफ मतलब हैं कि सरकार के साथ बैठे सहयोगी अब निगोशिएट करने की तैयारी में हैं! ओम प्रकाश राजभर के पास सबसे मलाईदार विभाग पंचायती राज़ है! ये मंत्रालय आम तौर पर या तो CM रखते हैं या अपने ख़ास के पास रखते हैं. दूसरी तरफ संजय निषाद हैं, साल 2018 में योगी के CM बनने के बाद उपचुनाव होता है...सपा के साथ संजय निषाद के गठबंधन का ये चमत्कार हुआ कि योगी की सीट पर संजय निषाद का बेटा प्रवीण निषाद चुनाव जीत जाते हैं! बीजेपी के खेमे में हलचल पैदा हो जाती है! UP की सियासत में अमित शाह की एंट्री होती है, 2019 के चुनाव से पहले गठबंधन हो जाता है! शाह ने संजय निषाद के बेटे को संतकबीर नगर से चुनाव लड़वाया, गोरखपुर की योगी की सीट पर BJP ने रवि किशन को खड़ा किया, दोनों सीटे बीजेपी जीत लेती है!
2022 विधानसभा चुनाव से पहले संजय निषाद को MLC बनाया गया, दूसरे बेटे सरवन निषाद को बीजेपी ने टिकट दिया! 11 विधायक संजय निषाद की पार्टी से सदन में पहुंचे ताकत समझी जा सकती है! नतीजा अब विधानसभा चुनाव से पहले विधायकों की संख्या बढ़ाने या फिर किसी दूसरी शर्त की तैयारी है! इसलिए दिल्ली की बैठक में संजय निषाद भी पहुंचे! संजय निषाद का पूरा परिवार सियासत में है!
इधर अपना दल की स्थिति को देखिए, अनुप्रिया पटेल खुद मोदी सरकार में मंत्री हैं, उनके पति आशीष पटेल योगी सरकार में मंत्री हैं, इनकी बहन पल्लवी पटेल सपा की सीट से विधायक हैं, जबकि परिवार के बाकी लोग भी सियासत में हैं! अब योगी सरकार पर आशीष पटेल लंबे समय से दबाव डाल रहे हैं! पिछड़ी जाति, पटेल समाज का होना, UP में PDA की सियासत पर बात होना. सबकुछ साफ इशारा करता है!
योगी के चौथे सहयोगी हैं जयंत चौधरी! लोकसभा में जयंत खुद मोदी सरकार में हैं! जबकि उनकी पार्टी योगी के साथ भी है! विधानसभा चुनाव में अगर अगर ये छोटे दल अलग हुए, या फिर सपा की तरफ गए तो बीजेपी को नुकसान हो सकता है! दिल्ली में हुए सम्मेलन के कई मायने निकाले जा रहे हैं!
अखिलेश यादव को बीजेपी संदेश देने वाली हैं कि पटेल समाज, निषाद समाज, राजभर समाज और जाट समाज बीजेपी के साथ हैं! ऐसे में अगर बीजेपी के गठबंधन के साथ कुछ ख़ास नहीं होता है तो इन नेताओं के इलाके में कोई ख़ास प्रभाव PDA नहीं छोड़ पाएगा! लेकिन सियासत में दोस्ती की आड़ में हमेशा समझौता होता है? बदले में बीजेपी से ये सभी चार यार क्या मांग करेंगे. ये वक्त तय करेगा...फिलहाल UP में ठाकुर जाति अलग, पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति के विधायक-सांसद अलग! ब्राह्मण विधायकों का गुट अलग मीटिंग कर रहा है! इसके क्या संकेत है? ये जनता बता पाएगी!