नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार को 92 साल की उम्र में यहां एम्स में निधन हो गया. मनमोहन सिंह साल 2004 से 2014 तक दो बार प्रधानमंत्री रहे थे. उनकी गिनती देश के बड़े अर्थशास्त्रियों में होती थी. मनमोहन सिंह 1998 से 2004 तक विपक्ष के नेता भी रहे. हालांकि, साल 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली जीत के बाद उन्होंने देश के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. उन्होंने यूपीए-1 और 2 में प्रधानमंत्री का पद संभाला था और 22 मई 2004 और दूसरी बार 22 मई 2009 को प्रधानमंत्री के पद की शपथ ली थी. हालांकि मनमोहन सरकार के दौरान कांग्रेस पर कई प्रकार के घोटाले के आरोप भी लगे थे. उन्ही में से 5 ऐसे घोटालों की चर्चा करेंगे, जिनपर देश में खूब हंगामा मचा था और तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था.
- 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला: यह घोटाला स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला माना जाता है, जिसमें लगभग एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ रुपए का घपला हुआ था. यह घोटाला 2008 में सामने आया, जब भारतीय सरकार ने 2जी (दूसरी पीढ़ी) मोबाइल नेटवर्क स्पेक्ट्रम (आवृत्ति) के लाइसेंस का आवंटन किया. इस मामले में आरोप था कि सरकारी अधिकारियों और टेलीकोम कंपनियों के बीच मिलीभगत से स्पेक्ट्रम के लाइसेंस को अनियमित तरीके से वितरित किया गया और इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ.
- कोयला आबंटन घोटाला: जिसे कोल गेट घोटाला भी कहा जाता है. इस घोटाले में लगभग 26 लाख करोड़ रुपए की लूट हुई थी. यह घोटाला कोयले के कैप्टिव ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था. भारत के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक है. यह घोटाला तब सामने आया जब यह पाया गया कि भारतीय सरकार ने कोयला खदानों का आवंटन करने में भ्रष्ट तरीके अपनाए थे, जिससे सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिला. इस घोटाले ने भारतीय राजनीति, प्रशासन और न्यायिक प्रणाली को हिला दिया था.
- अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला: यह घोटाला अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीदने से जुड़ा था, जिसमें लगभग 3,600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था. अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला भारत का एक प्रमुख रक्षा घोटाला था, जो 2013 में सामने आया. यह घोटाला तब सुर्खियों में आया जब यह खुलासा हुआ कि भारतीय वायुसेना के लिए 12 वीवीआईपी (Very Very Important Person) हेलीकॉप्टरों की खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था. इस मामले में भारतीय सरकारी अधिकारियों और विदेशी रक्षा कंपनी के अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप लगे.
- कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला: यह घोटाला 2010 में हुआ था, जब कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए बड़े पैमाने पर धन का आवंटन किया गया था, जिसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था.दिल्ली में आयोजित 19वें कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान सामने आया. यह घोटाला खेलों के आयोजन से संबंधित निर्माण कार्यों, ठेकेदारी प्रक्रियाओं और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ था. घोटाले में भारतीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच भ्रष्टाचार के आरोप थे, जो आयोजन में अनावश्यक लागत और देरी का कारण बने.
- एडार्श सोसाइटी घोटाला: यह घोटाला महाराष्ट्र राज्य के मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में स्थित एडार्श हाउसिंग सोसाइटी से जुड़ा हुआ था. इस घोटाले में आरोप थे कि उच्च राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों ने एक आवासीय परियोजना के लिए सरकारी भूमि का अवैध तरीके से फायदा उठाया और व्यक्तिगत लाभ के लिए भूमि का गलत तरीके से आवंटन किया.
हालांकि इन घाटालों को छोड़ दें तो बहुत कम ऐसे मौके मिले, जब मनमोहन सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा हो. साथ ही मनमोहन सरकार ने कई ऐसे कार्य भी किए, जिसपर वर्षों तक देशवासी गर्व करेंगे. उन्हीं में से कुछ काम हैं... शिक्षा का अधिकार अधिनियम, सूचना का अधिकार अधिनियम, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर स्कीम. मनमोहन सरकार की इन योजनाओं की चर्चा आज न सिर्फ देश में हो रही है, बल्कि दुनियाभर के अर्थशास्त्री सीख लेते हैं. ये सारी जानकारियां इंटरनेट के माध्यम से जुटाई गईं हैं, इसलिए आकंड़ों में बदलाव की गुंजाइश हो सकती है.
manmohan singh
manmohan singh coal scam
dr manmohan singh
upa government scams