यवतमाल: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के नेर तालुका में स्थित अजंती पारधी बेडा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. चिलचिलाती धूप और पानी की तंगी के बीच 6 वर्षीय अन्वी भोसले पानी लाने निकली थी, लेकिन घर वापस नहीं लौट सकी. रास्ते में ही उसकी जान चली गई.
350 लोगों के गांव में पानी की भारी किल्लत
ग्रामीणों के अनुसार, इस गांव में करीब 350 लोग रहते हैं, लेकिन यहां के नल सिर्फ नाम के हैं. कई-कई दिनों तक इनमें पानी नहीं आता. मजबूरी में लोग आधे किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाते हैं. इसी पानी की तलाश में छोटी अन्वी तेज धूप में निकली. कुछ दूर चलते-चलते उसे चक्कर आया और वह वहीं ढेर हो गई. परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है.
सिस्टम की लापरवाही से प्यासे हैं लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में पानी की समस्या सालों से चली आ रही है. नल लगे तो हैं, मगर 7-8 दिनों तक सूखे पड़े रहते हैं. पारधी समाज के ये गरीब परिवार पानी के लिए रोज जद्दोजहद करते हैं. भीषण गर्मी में 6 साल की बच्ची को यह बोझ उठाना पड़ा और उसकी कीमत उसकी जान बनी. स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच कर रहा है, लेकिन पोस्टमार्टम न होने के कारण मौत का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है. संभावना जताई जा रही है कि तेज गर्मी और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) ने इस मासूम की जान ली. यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत में आज भी बुनियादी सुविधाओं, खासकर पीने के पानी की भारी कमी को उजागर करती है.
सवाल यह है कि क्या आजादी के इतने साल बाद भी गांवों में पानी जैसी बुनियादी जरूरत पूरी करना इतना मुश्किल है? अन्वी की मौत एक छोटी सी बच्ची का आंकड़ा भर नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी की दर्दनाक मिसाल बन गई है.