ये कहानी शायद आपको पसंद आएगी! किसी इलाके में घुसकर जीत हासिल करने का मज़ा अलग है, लेकिन जो हारा है उसका दर्द भी बहुत है! अखिलेश यादव को कुंदरकी हारने का जो दर्द हो रहा है, उसका अंदाजा शायद बीजेपी समर्थकों को ना हो!
मुरादाबाद मंडल में कुल 5 जिले आते हैं, पहला रामपुर, आज़म ख़ान का गढ़, दूसरा संभल जहां की सियासत में साल 1974 से इकतरफा चुनाव जितने वाले शफीकुर्रहमान बर्क, तीसरा मुरादाबाद जहां पूर्व सांसद ST हसन का राज़ था...चौथा बिजनौर जहां अब चंद्रशेखर का कद बढ़ रहा है, तो पाँचवा अमरोहा जिला भी मुस्लिम बहुल है
लेकिन रामपुर और संभल की सियासत ही मुरादाबाद की सियासत तय करती थी...अखिलेश मुरादाबाद जितने के लिए रामपुर में आज़म खान के घर क्यों गए थे? 94 साल के शफीकुर्रहमान बर्क होते तो क्या बीजेपी कुंदरकी जीत जाती ?
इस सवाल को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा! साल 1974 में पहली बार बने विधायक, पश्चिम UP में मुसलमानों का चेहरा बन गए, लेकिन बसपा में होने के कारण वो कभी संभल और मुरादाबाद से आगे नहीं बढ़ पाए, हालांकि वो कभी सपा तो कभी बसपा में आते रहे,
बीजेपी संभल की सीट मोदी नेतृत्व में तीनों बार हारी...2014 और 2019 में चुनाव जीते शफ़ीकुरहमान बर्क का संसद में जब PM मोदी से सामना हुआ तो संसद परिसर में नमाज पढ़ने का जगह मांग ली....उस दिन PM मोदी ने बर्क के बारे में जो बोला था वो वायरल हो गया था...
27 फरवरी 2023 में निधन हो गया...विवादों से गहरा नाता था...विवादित बयानों के लिए प्रसिद्ध थे...हिन्दू विरोधी छवि थी...और मुसलमानों की गलती पर भी समर्थन रहता था...मुसलमानों में पकड़ अच्छी थी...तो अपने बेटे जियाउर्रहमान को मुरादाबाद की उसी कुंदरकी से चुनाव लड़ाया जहां इस बार योगी ने जीत हासिल की है....बर्क के बेटे को वहां दो बार चुनाव जीतने का मौका मिला, लेकिन जैसे ही शफीकुर्रहमान की मौत हुई, उनके बेटे जियाउर्रहमान सपा के टिकट से साल 2024 में संभल से लोकसभा जीते और कुंदरकी सीट खाली हो गई!
अखिलेश यादव को आज़म ख़ान के घर पर जा कर सिर झुकाना पड़ा, जबकि कहा जाता है कि आज़म और अखिलेश यादव के राजनीतिक विचार नहीं मिलते थे, इसलिए वो कभी जेल नहीं गए, और ये भी कहा जाता है कि अखिलेश, आज़म जैसे नेताओं वाली सपा से बाहर आना चाहते थे,
लेकिन योगी ने जो फिल्डिंग लगाई उसमें अखिलेश बुरी तरह फंस गए, शफीकुर्रहमान अब हैं नहीं, और आज़म जेल में है, मुसलमानों के साथ बीजेपी ने बड़ा खेल कर दिया! कुंदरकी सीट जीत ली...7 बार के सांसद और दो बार के विधायक शफीकुर्रहमान के ना होने के कारण योगी ने भांप लिया था कि जीत पक्की है, शफीकुर्रहमान की उम्र को लेकर एक बार KBC में भी सवाल पूछा गया, नरेंद्र मोदी ने संसद में नाम लेकर सम्मान दिया, योगी आदित्यनाथ भी सम्मान देते थे,लेकिन ये सियासत है
जब मौका मिला सूद समेत ब्याज़ वसूल लिया जाता है! योगी आदित्यनाथ कुंदरकी जीत कर ज्यादा खुश दिखाई दिए, क्योंकि ये सीट मोदी की हवा में भी बीजेपी नहीं जीत पाई थी, लेकिन योगी राज़ में संभव बना लिया! अखिलेश को ताना भी मारा, कुंदरकी हार का मतलब क्या है ये सपा बेहतर समझती होगी...(योगी की बाइट) ये कहानी आपको इसलिए सुनाई ताकि आप समझ पाए कि योगी को अब चुनाव लड़ना और जीतना आ गया है!
सपा मुसलमानों को ये नहीं समझा पाई कि ये सीट हमारी नाक की लड़ाई है, और योगी ये समझाने में कामयाब हो गए कि मुस्लिम गढ़ में हिन्दुओं को एक होना चाहिए!