Hathras Stampede Accident: नारायण साकार हरि ऐसे बना 100 करोड़ का मालिक, चंदे की लिस्ट में हुआ खुलासा!

Global Bharat 08 Jul 2024 3 Mins 747 Views
Hathras Stampede Accident: नारायण साकार हरि ऐसे बना 100 करोड़ का मालिक, चंदे की लिस्ट में हुआ खुलासा!

संदीप शर्मा

Hathras Stampede Accident के बाद जो बाबा कहता था मैं गरीबों से एक रुपया दान नहीं लेता उसने आलीशान कोठरी कैसे बनाई इसकी पूरी कहानी अब सामने आ गई है. पुलिस जांच में एक रजिस्टर सामने आया है. यूपी पुलिस (UP Police) को ये रजिस्टर जैसे ही हाथ लगा बाबा अंडरग्राउंड होने की सोचने लगा क्योंकि इस रजिस्टर में बाबा के हर आश्रम का राज छिपा है. किस आश्रम में कितना रुपया कहां से आया, कहां गया, सबकुछ लिखा है. कौन से विभाग के बाबू ने नोटों की गड्डियां पकड़ाई, किस नेताजी ने पैरवी करके जमीन पर कब्जा करवाया, इस रजिस्टर में हर एक राज छिपा है.

बाबा को 200 लोगों ने दिया था चंदा

इस रजिस्टर के रिकॉर्ड बताते हैं कि अकेले मैनपुरी वाले आश्रम में बाबा को 200 लोगों ने चंदा दिया. 10 हजार से ढाई लाख रुपये तक का चंदा सेवादारों के जरिए पहुंचा. हर आश्रम में एक दान पेटी होती थी, जिसमें पैसे रखे जाते थे. कभी बाबा का चमत्कार देखकर तो कभी चढ़ावे में ये पैसे दिए गए. रजिस्टर से खुलासा हुआ है कि बड़े-बड़े नेता और अधिकारियों ने नारायण साकार हरि (Narayana Saakar Hari) को दान दिया है.

मंत्री आलमगीर आलम जैसा है हाल

हालांकि इस रजिस्टर में किसी का नाम नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों में जब कैश में लेन-देन की बात होती है तो हमेशा लोग अपना नाम नहीं लिखवाते. भरोसेमंद लोगों का नाम रजिस्टर में लिखवा दिया जाता है, ताकि रिकॉर्ड में नाम भी नहीं आए और काम भी हो जाए. कुछ दिनों पहले झारखंड से एक ख़बर आई थी वहां के मंत्री आलमगीर आलम (Minister Alamgir Alam) ने अपने करोड़ों रुपये अपने पर्सनल सेक्रेटरी के यहां छिपा रखे थे. जब छापा पड़ा तो सारे राज खुले. यही हाल हाथरस वाले बाबा का भी है.

1999 में बनवाया था पहला आश्रम

साल 1999 में इस बाबा ने अपना पहला आश्रम अपने गांव बहादुर नगर पटियाली में बनवाया. ये वो वक्त था जब बाबा ने यूपी पुलिस की नौकरी छोड़ी थी. 90 के दशक का ये वो दौर था जब आम तौर पर सिपाहियों की सैलरी ज्यादा से ज्यादा 500 से हजार रुपये हुआ करती थी. उस वक्त बाबा ने करोड़ों रुपए का एक आलीशान महल बनवाया. उसके बाद कई जिलों में जमीन कब्जाता चला गया.

नारायण साकार हरि के अनेक रंग

आम तौर पर बाबाओं को जमीन दान में भी मिल जाती है और जब प्रसिद्धि बढ़ जाती है तो वो आसपास की जमीनों पर अपने गुर्गों की मदद से कब्जा भी कर लेता है. ये वही बाबा करते हैं, जिनके मुंह में राम और बगल में छुरी होती है. लेकिन नारायण साकार सिर्फ ऐसा ही बाबा नहीं है, बल्कि नारायण साकार हरि के अनेक रंग है. यही वजह रही कि इतने बड़े मामले के बाद भी सीधे तौर पर यूपी पुलिस बाबा पर हाथ डालने से अब भी बच रही है.

तत्कालीन सरकार भी है जिम्मेदार

लेकिन सवाल ये है कि अगर कोई आलीशान महल बनाता है तो सवाल तभी खड़े होने चाहिए थे. लेकिन बाबा ने कुछ लोगों को इतनी तेजी से बेवकूफ बनाया कि सब गुणगान करने लगे. जब नारायण साकार हरि की प्रसिद्धि अपने इलाके में बढ़ने लगी तो कई जिलों में अपने पांव पसारे और अपने मेन गेट पर लिखवाया बाबा की संपूर्ण ब्राह्मण्ड में जय हो.

चरणों की धूल लेने दौड़े थे भक्त

ये पूरी दुनिया पर अपना ऐसा ही साम्राज्य चलाना चाहता था, जो भी गरीब लोग कथा में आते भीड़ बनकर कथा सुनते और चले जाते. लेकिन जिसे पास जाना होता, बाबा के चरणों की धूल को माथे से लगाना होता, उससे पैसा लिया जाता था और उस दिन भी हाथरस में यही खेल हुआ था. गरीब चरणों की धूल के चक्कर में स्वर्ग सीधार गया और बाबा उन्हें बचाने की बजाय भाग खड़ा हुआ. आज 1000 रुपये कमाने वाला बाबा 100 करोड़ी बाबा बना बैठा है और गरीब जनता उसके पाखंड के चक्कर में बेसूध पड़ी है. ऐसे बाबाओं पर एक्शन नहीं हुआ तो फिर आम जनता का भगवान ही मालिक है.

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