मुंबई से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर ठाणे जिले के बदलापुर में बदले की भावना भड़क रही थी. लाखों लोग सड़कों पर थे, कोई रेल रोक रहा था, तो कोई गाड़ियों की आवाजाही ठप्प करने पर लगा था. सबकी यही डिमांड थी आरोपी को हमारे सामने लाओ, हम सजा देंगे. जिले के डीएम-एसपी और बड़े-बड़े अधिकारियों के होश उड़े हुए थे. कोई कह रहा था बुलडोजर जरूरी है तो कोई कह रहा था भीड़ कंट्रोल करना मुश्किल है. यहां तक कि महाराष्ट्र के डीजीपी के ऑफिस में लगातार फोन बज रहे थे, तभी देवेन्द्र फडणवीस की एंट्री होती है. डिप्टी सीएम के साथ-साथ महाराष्ट्र के गृहमंत्री का पद संभाल रहे फडणवीस अपने खास अधिकारियों को बुलाते हैं, पूरे हालात को गौर से समझते हैं, और उसके बाद तीन बड़े आश्वासन देते हैं.
कुछ घंटे पहले तक जो लोग हाथों में बैनर, पोस्टर और पत्थर लेकर खड़े थे, भावनात्मक मुद्दे में अपना फायदा देख रहे थे, वो भाग खड़े होते हैं. जिसके बाद फडणवीस के इस फैसले की चर्चा हर तरफ होने लगती है, महाराष्ट्र पुलिस के बड़े-बड़े सिंघम अधिकारी फडणवीस के दिमाग को सैल्युट करते हैं. यहां तक कि सीएम एकनाथ शिंदे भी ये समझ जाते हैं कि गृहमंत्रालय की जिम्मेदारी देवेन्द्र फडणवीस को देना बेहद जरूरी था, क्योंकि ये पहले महाराष्ट्र के सीएम भी रह चुके हैं, पर जिस हिसाब से हालात को मैनेज करना जानते हैं, हालात के हिसाब से फैसला लेना जानते हैं उस हिसाब से ऐसी चर्चा चल रही है कि जल्द ही इन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.
ग्लोबल भारत के एडिटर इन चीफ संदीप शर्मा बताते हैं पार्टी के भीतर फडणवीस को लेकर बड़ा मंथन चल रहा है और अध्यक्ष बनने की रेस में देवेन्द्र फडणवीस काफी आगे हैं. इसके बहुत सारे कारण हैं. आप अगर बात करते हैं तो बाकियों की तुलना में संगठन और सरकार दोनों को चलाने का इन्हें अच्छा अनुभव है. चूंकि ये नागपुर से हैं, तो आरएसएस से भी इनके अच्छे रिश्ते बताए जा रहे हैं. चूंकि ये हिंदुत्व के मुद्दे को मुखरता से उठाते रहे हैं, इसलिए आरएसएस के गुडबुक में हैं. जब महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम वाली बात आई, दूसरी बार इन्होंने सरकार बनाई. जिसमें इनका बहुत बड़ा रोल माना जाता है.
उस समय ऐसी ख़बरें आई कि अमित शाह और जेपी नड्डा दोनों को इन्होंने करीब-करीब मना कर दिया था कि वो डिप्टी सीएम नहीं बनना चाहते,पर जब पीएम मोदी ने बोला तो ये मान गए. उसके कारण इनका मोदी से रिश्ता अच्छा है. इसके अलावा बीजेपी में एक सेकेंड लाइन खड़ी करने की भी बात चल रही है, युवा भी हैं. ताकि जो आगे कोई नेता बने तो उसे भी उस तरह का अनुभव है, इन चीजों का जब देखेंगे तो लगेगा कि देवेन्द्र फडणवीस इस रेस में काफी आगे हैं. शायद यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर रखने वाले कई पत्रकार इस बात को मानते हैं कि फडणवीस की जल्दी ही दिल्ली में एंट्री हो सकती है.