चुनाव से पहले बीजेपी जीती तो अपहरण का मुकदमा चलाने की मांग क्यों होने लगी!

Global Bharat 23 Apr 2024 03:45: PM 2 Mins
चुनाव से पहले बीजेपी जीती तो अपहरण का मुकदमा चलाने की मांग क्यों होने लगी!

गुजरात के सूरत सीट पर ऐसा क्या हुआ कि डीएम साहब ने बीजेपी प्रत्याशी को चुनाव से पहले ही जीत का सर्टिफिकेट दे दिया, क्या डीएम साहब को चुनाव आयोग ने ऐसा करने का आदेश दिया या मामला कुछ और है, इस तस्वीर को देखकर कई कांग्रेसी टेंशन में हैं, राहुल गांधी 24 घंटे से बीमार हैं, सोनिया गांधी समझ नहीं पा रही हैं कि मोदी को हराने का सपना ऐसे कैसे साकार होगा. यहां तक कि कई कांग्रेस प्रत्याशी अभी से अपने कागजात ढूंढने लगे हैं, क्योंकि सूरत के अधिकारी ने जो किया है, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी.
दरअसल सूरत सीट से बीजेपी प्रत्याशी मुकेश दलाल ने चुनाव आयोग को ये शिकायत दी कि उनके प्रतिद्वंदी मुकेश नीलेश कुंभाणी के नामांकन की जांच होनी चाहिए, नीलेश कुंभाणी ने जिन तीन प्रस्तावकों का नाम दिया था, उनके साइन फर्जी हैं, चुनाव आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए, कांग्रेस प्रत्याशी को नोटिस जारी किया, 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा, पर नीलेश कुंभाणी जवाब नहीं दे पाए, उसी दौरान तीनों प्रस्तावक ने जिला पीठासीन अधिकारी के सामने जाकर ये कहा कि ये साइन मेरे नहीं है, नतीजा कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया. 
हैरानी की बात ये थी कि इस सीट पर कुल 24 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, जिनमें से 12 के नामांकन रद्द हो गए, बाकी बचे उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए और बीजेपी उम्मीदवार को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया, पिछली बार बीजेपी नेता दर्शन जरदोस ने यहां से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार बीजेपी ने दर्शना का टिकट काटकर मुकेश को उम्मीदवार बनाया था, जिनकी किस्मत इतनी अच्छी निकली कि बिना वोटिंग के ही जीत का सर्टिफिकेट मिल गया और मोदी के 400 
हालांकि बीजेपी प्रत्याशी भले ही खुशी मना रहे हों, पर कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर अब नए तरह का विरोध शुरू कर दिया है. कांग्रेस का कहना है कि वो इसे लेकर हाईकोर्ट जाएगा, प्रस्तावकों को डराया-धमकाया गया है, इसीलिए वो पलट गए, और आशंका है कि इनका अपहरण किया गया है, इसलिए इस मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए, कांग्रेस ने तो सूरत के डीएम पर भी आरोप लगाए हैं, और कह रही है कि मैच फिक्स था, तो सवाल है कि जब सबकुछ चुनाव आयोग के आदेश पर जब हुआ तो फिर ऐसी बातों क्यों.
क्या ये कांग्रेस की कमजोर ऱणनीति का नतीजा है, सूरत सीट पर बीजेपी की निर्विरोध जीत के बारे में सुनने के बाद कई लोग तो ये भी कहने लगे हैं कि जो कांग्रेस अपने करीबियों और परिवारवालों को नहीं समझा पा रही है वो जनता को कैसे समझाएगी, ये तो वही हाल हो गया कि सपना मोदी को हराने का देख रहे हैं, पर मोदी के एक सिपाही को भी नहीं हरा पा रहे और चुनाव से पहले ही हार कबूल करनी पड़ रही है. आप सूरत सीट पर हुए इस पूरे मामले पर क्या कहना चाहेंगे, कमेंट कर बता सकते हैं.

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