Super Thief Engineer : मैकेनिकल इंजीनियर बना, फिल्म इंडस्ट्री में अच्छाखासा करियर बनाया, और फिर बन गया महाचोर, ऐक ऐसा चोर जिस पर देखते ही देखते सैकड़ों मुकदमे दर्ज हो गए, कहते हैं कि अपराध का कोई चेहरा नहीं होता, लेकिन जब एक पढ़ा-लिखा और सभ्य दिखने वाला इंसान अपराध की दुनिया में कदम रखे, तो कहानी चौंकाने वाली बन जाती है। ऐसा ही मामला सामने आया है बेंगलुरु में, जहां एक मैकेनिकल इंजीनियर और फिल्म इंडस्ट्री में काम कर चुका व्यक्ति 27 सालों तक चोरी करता रहा और 88 से ज्यादा मामलों में पुलिस को चकमा देता रहा।
तेलुगु इंडस्ट्री में काम करता था श्रीनिवास
इस शख्स का नाम है श्रीनिवास। यह पेशे से एक समय इंजीनियर था और तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में तकनीकी टीम का हिस्सा भी रहा। परंतु एक गलती उसकी ज़िंदगी को अपराध के दलदल में ले गई। श्रीनिवास को जुए की बुरी लत लग गई थी। आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के बोझ ने उसे ऐसे रास्ते पर धकेल दिया, जहां से वापसी मुश्किल थी।
1997 से कर रहा चोरी
पुलिस के अनुसार, श्रीनिवास साल 1997 से चोरी कर रहा था और उसने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में दर्जनों घरों को निशाना बनाया। वह हाईटेक तरीके से काम करता था और केवल उन्हीं घरों में चोरी करता था जो बंद होते थे। वह हमेशा अलग-अलग शहरों में रहकर काम करता था, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन ट्रेस करने में दिक्कत होती थी।
पुलिस की पकड़ में अब आया
2 मई 2025 को आखिरकार बेंगलुरु पुलिस की एक टीम ने उसे नागवारा इलाके से गिरफ्तार कर लिया। वह एक पेइंग गेस्ट हाउस में छिपा हुआ था और उसके पास से नकदी, आभूषण और चोरी का अन्य सामान बरामद किया गया। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि वह हर शहर में नकली पहचान का इस्तेमाल करता था और उसके पास अलग-अलग राज्यों के फर्जी दस्तावेज भी पाए गए।
दिलचस्प बात यह है कि श्रीनिवास अपने काम में इतना माहिर था कि वह हर बार पुलिस के हाथ से बच निकलता था। पुलिस को जब भी चोरी की सूचना मिलती, उन्हें घटनास्थल पर एक जैसी शैली मिलती—कोई फिंगरप्रिंट नहीं, कोई सुराग नहीं। यही कारण था कि श्रीनिवास को ‘सुपर चोर’ का नाम दिया गया।
अब जब श्रीनिवास पकड़ा जा चुका है, पुलिस उसके पुराने मामलों को दोबारा खोल रही है और उम्मीद की जा रही है कि 88 से भी ज्यादा चोरी के मामलों को उसके खिलाफ जोड़ा जा सकता है। इस गिरफ्तारी से एक बार फिर यह साबित होता है कि अपराध चाहे कितना ही चालाक क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना नामुमकिन है।