प्रधानमंत्री के 'ईंधन बचाओ' अपील का BJP नेता पर नहीं हुआ असर, 50 कारों के काफिले में उज्जैन से भोपाल पहुंचे

Amanat Ansari 12 May 2026 03:08: PM 2 Mins
प्रधानमंत्री के 'ईंधन बचाओ' अपील का BJP नेता पर नहीं हुआ असर, 50 कारों के काफिले में उज्जैन से भोपाल पहुंचे

उज्जैन: मध्य प्रदेश में एक भाजपा नेता लगभग 50 वाहनों के काफिले में यात्रा करने के बाद चर्चा में हैं, क्योंकि ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान युद्ध के बीच ईंधन खपत कम करने की राष्ट्रव्यापी अपील की थी. मध्य प्रदेश टेक्स्टबुक कॉर्पोरेशन के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर उज्जैन से भोपाल अपने नए पदभार ग्रहण करने जा रहे थे. उनके साथ एसयूवी और समर्थकों के वाहनों का काफिला था. वीडियो फुटेज में दिखा कि हाईवे पर काफिला लंबा फैला हुआ था.

समर्थक कई जगहों पर रुककर ठाकुर का स्वागत कर रहे थे. इन बार-बार रुकने से कई जगहों पर यातायात बाधित हुआ और आम यात्रियों को परेशानी हुई. ये तस्वीरें इसलिए ज्यादा चर्चा में आईं क्योंकि ये प्रधानमंत्री मोदी की अपील के महज एक दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और उससे भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित दबाव को देखते हुए लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की थी.

तेलंगाना में रविवार को भाजपा की रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से अपील की कि वे अनावश्यक ईंधन उपयोग कम करें, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, मेट्रो सेवाओं का उपयोग करें, कारपूलिंग अपनाएं और इलेक्ट्रिक वाहनों पर ज्यादा भरोसा करें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक संयम और विदेशी मुद्रा संरक्षण की अपील करते हुए कहा कि कोविड-19 के दौरान हम वर्क-फ्रॉम-होम, वर्चुअल मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर चले गए थे. अभी की जरूरत है कि हम उन तरीकों को फिर से अपनाएं. उन्होंने लोगों को गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने और सोने की खरीदारी जैसी विवेकाधीन खर्चों को स्थगित करने की भी सलाह दी, साथ ही स्वदेशी उत्पादों और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया.

हालांकि, भाजपा नेता के इस बड़े काफिले ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या प्रधानमंत्री की संयम और ईंधन संरक्षण की अपील उनके अपने दल के नेताओं द्वारा भी पालन की जा रही है. यह मुद्दा अब व्यापक राजनीतिक टकराव में बदल गया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की जनता से 'बलिदान' की अपील, शासन की नाकामी को दर्शाती है.

कल राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "कल मोदी जी ने जनता से बलिदान करने की अपील की... ये सलाह के शब्द नहीं, बल्कि नाकामी के सबूत हैं." उन्होंने सरकार पर जिम्मेदारी जनता पर डालने का आरोप लगाया. भाजपा ने इस पर तेजी से पलटवार किया और कांग्रेस पर वैश्विक संकट के समय राजनीति करने का आरोप लगाया. भाजपा ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को नहीं समझ रही है.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए सरकार की अपील देश को वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाने के लिए है. "प्रधानमंत्री ने जो कहा, वो सरकार का कर्तव्य था," त्रिवेदी ने इसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जारी की जाने वाली सतर्कता संबंधी सलाह से तुलना की.

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी मोदी के बयान का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने सिर्फ लोगों से राष्ट्रीय हित में "सचेत विकल्प चुनने" की अपील की थी, ताकि ऊर्जा संरक्षण हो और आत्मनिर्भरता बढ़े.

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