हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के नतीजे आते ही क्या केजरीवाल को फिर जाना पड़ेगा जेल?

Abhishek Shandilya 09 Oct 2024 07:17: PM 3 Mins
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के नतीजे आते ही क्या केजरीवाल को फिर जाना पड़ेगा जेल?

क्या केजरीवाल अपने ही जाल में फंस गए? क्या केजरीनाल बेईमान हैं ये बात साबित हो गई है? जिस सर्टिफिकेट की बात केजरीवाल कर रहे थे क्या उन्हें वो दोबारा जेल भेज देगा? केजरीवाल का चुनाव में सूपड़ा साफ हो गया. केजरीवाल की कहानी क्या राजनीतिक तौर पर ख़त्म हो गई है? क्या केजरीवाल ने इस्तीफा देकर बड़ी गलती कर दी थी? हरियाणा चुनाव में फायदा लेने के लिए केजरीवाल ने मौके पर इस्तीफा दिया, खुद को शहीद बताया, आतिशी को CM बनाया लेकिन हर दांव उल्टा पड़ गया. बीजेपी की इस कोशिश में कहानी एकदम नई-नई सी लगती है. हरियाणा का चुनाव केजरीवाल के लिए इसलिए बेहद अहम है, क्योंकि कई सीटें दिल्ली से लगी है. दिल्ली से सटी सीटों का आंकड़ा देखकर केजरीवाल कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलेंगे.

  • हरियाणा में कुल सीटें है 90, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन नहीं हो पाया था.
  • हरियाणा में आम आदमी पार्टी अकेले लड़ी तो पता चला उनकी हालत फिसड्डी से भी बुरी.
  • हरियाणा में केजरीवाल की पार्टी को करीब 1 प्रतिशत वोट ही मिला है, जो बहुत ही कम है.
  • NCR यानि नेशनल कैपिटल रिज़न मतलब वो हिस्सा जो दिल्ली के आस-पास का इलाका है.
  • गुरूग्राम और दिल्ली एक ही, फिर भी केजरीवाल की पार्टी गुरूग्राम में एकदम फिसड्डी है.
  • गुरूग्राम के AAP उम्मीदवार से ज्यादा वोट नोटा को मिला है. ये हाल करीब हर सीट पर एक जैसा है.

फरीदाबाद भी दिल्ली से सटा इलाका है लेकिन वहां केजरीवाल की पार्टी हांफती हुई नज़र आई? किसी को 200 वोट मिले हैं तो किसी को 500 वोट से ही संतोष करना पड़ा है. मसला ये है कि क्या ये आंकड़े देखकर केजरीवाल खुश होंगे या उन्हें दिल्ली हाथ से जाने का डर सताने लगा है. केजरीवाल का खेल टांय-टांय फिस्स हो गया है. केजरीवाल ने इस्तीफा देते वक्त कहा था अगर मैं ईमानदार हूं तो ये बात जनता तय करेगी. तो क्या केजरीवाल को जनता ईमानदार नहीं मानती है. खुद को PM का दावेदार देखने वाले केजरीवाल की हालत क्या है? क्या वो आज नरेंद्र मोदी के बराबर के नेता है? क्या वो योगी से बड़े नेता हैं? योगी को हटाने का बयान दिया था, वक्त कैसे बदला, सिर्फ 150 दिनों में योगी ने अपने दम पर दिल्ली के आस-पास वाले इलाके में केजरीवाल को घुमने तक नहीं दिया. आज योगी बुलंदी पर हैं और केजरीवाल की सियासी ज़मीन धंस रही है. कहते हैं कि वक्त से ज्यादा इंसान अगर हवाबाज़ी करे तो परिणाम घातक होते हैं, क्या केजरीवाल के साथ वही हुआ? आतिशी को CM बनाया, लेकिन ये नाटक काम ना आया? ये नाटक इसलिए क्योंकि जब आतिशी पहली बार मीडिया के सामने आई तो वो केजरीवाल की कुर्सी के बगल में अपनी कुर्सी लगाती हैं, खड़ाऊं पॉलिटिक्स खेलने लगती हैं, शहीद का तमगा लेने वाले केजरीवाल की शहादत का फर्क जनता पर नहीं पड़ा.

  • जम्मू की डोडा सीट पर केजरीवाल की पार्टी जीती है, यानि वहां एक सीट से खाता खुला है.
  • लेकिन मोदी और योगी के सामने केजरीवाल का कोई कद नहीं है ये बात साफ हो चुकी है.
  • क्योंकि योगी-मोदी और RSS ने जब एक साथ आकर ताकत लगाई तो सारी बातें हवा में उड़ी.

केजरीवाल की तैयारी थी कि वो साल 2029 में नरेंद्र मोदी को हरा देंगे, लेकिन सच्चाई और भ्रम में फर्क होता है...ये सच्चाई ऐसी है जिसको शायद कोई आप का नेता स्वीकार कर पाए, लेकिन सच ये है कि केजरीवाल की पार्टी को अभी वक्त लगेगा? क्योंकि एक तरफ योगी जैसा फायरब्रांड नेता है, दूसरी तरफ मोदी जैसा विशाल नेता है. दोनों नेताओं को यू ही जनता पसंद नहीं करती है, बल्कि सालों तक उन्होंने जनता के बीच रहकर बिना ड्रामा किए सेवा का भाव रखा है. केजरीवाल ने घर छोड़ा लेकिन जनता समझ चुकी थी कि ये भी पार्टी ऑफ ड्रामा है. चुनावी नतीजों ने आभास करवाया है कि दिल्ली में भी केजरीवाल की सराकर जा सकती है, क्योंकि दिल्ली के आस-पास वाले इलाके में एक भी सीट केजरीवाल तो मिलना दूर कोई उम्मीदवार 10 हज़ार वोट लेकर भी नहीं आया.

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