AAP student wing ASAP: दिल्ली में सियासी जमीन को खो चुकी आम आदमी पार्टी अब नए प्रयोग करना शुरू कर चुकी है, सत्ता में वापसी के लिए केजरीवाल ने अभी से कोशिशें शुरू कर दी हैं, जिसका नतीजा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने मंगलवार को अपने नए छात्र संगठन ‘ASAP’ (Association of Students for Alternative Politics) की औपचारिक शुरुआत की। इस संगठन को AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लॉन्च किया। दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी इसे एक नई ऊर्जा के साथ छात्र राजनीति में वापसी की रणनीति मान रही है।
देश में हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति- केजरीवाल
इस अवसर पर बोलते हुए केजरीवाल ने कहा, “देश की समस्याओं की सबसे बड़ी वजह 75 साल से चल रही हिंदू-मुस्लिम राजनीति है। अब वक्त आ गया है कि युवा इससे बाहर निकलकर वैकल्पिक राजनीति को अपनाएं।” उन्होंने बीजेपी पर भी हमला बोला और कहा कि दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है और लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है।
पिछली विंग CYSS रही थी असफल
AAP ने कुछ साल पहले CYSS (छात्र युवा संघर्ष समिति) के नाम से छात्र विंग की शुरुआत की थी, जिसने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों (DUSU) में भी हिस्सा लिया। हालांकि, उसे कोई खास सफलता नहीं मिल सकी। CYSS का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिससे पार्टी ने छात्र राजनीति में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अब नए नाम और दृष्टिकोण के साथ वापसी की है।
ASAP: उद्देश्य और रणनीति
ASAP के गठन का उद्देश्य देशभर के छात्रों को भ्रष्टाचार-मुक्त, धर्मनिरपेक्ष और विकासोन्मुख राजनीति से जोड़ना है। AAP नेतृत्व का मानना है कि छात्र सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के वाहक होते हैं। ASAP के ज़रिए पार्टी शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर छात्रों को लामबंद करना चाहती है। केजरीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि ASAP किसी भी छात्र पर अपनी विचारधारा थोपने का मंच नहीं है, बल्कि यह विकल्प की राजनीति को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ASAP के ज़रिए AAP छात्र राजनीति में फिर से पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है, जो आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए उपयोगी हो सकती है।