चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. विपक्षी दल AIADMK के अंदर गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी दो खेमों में बंट चुकी है और करीब 40 विधायकों ने सीवी शनमुगम गुट का समर्थन करते हुए विधानसभा स्पीकर से एसपी वेलूमनी को विधायक दल का नेता मान्यता देने की मांग की है. बताया जा रहा है कि पार्टी के मौजूदा नेता एडप्पाडी क पलनीस्वामी यानी EPS की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है. सूत्रों का दावा है कि अब उनके समर्थन में महज 17 विधायक ही बचे हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व पर संकट और गहरा गया है.
सियासी घमासान के बीच सीवी शन्मुगम ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि EPS मुख्यमंत्री बनने के लिए सत्ताधारी (DMK) के संपर्क में थे. दावा किया गया कि जैसे ही विधायकों को इस कथित डील की भनक लगी, पार्टी के भीतर असंतोष फूट पड़ा और बगावत शुरू हो गई. तमिलनाडु की राजनीति को और दिलचस्प बनाते हुए बागी खेमे के अब (TVK) को समर्थन देने की चर्चा तेज हो गई है. अगर ऐसा होता है तो मुख्यमंत्री विजय की पार्टी को बड़ा राजनीतिक फायदा मिल सकता है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIADMK का यह संकट केवल नेतृत्व की लड़ाई नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदलने वाला मोड़ साबित हो सकता है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि पार्टी EPS के नेतृत्व में एकजुट रहती है या फिर बागी गुट अलग राह चुनता है. फिलहाल तमिलनाडु की सियासत में उठे इस तूफान ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और सभी की निगाहें अब AIADMK के अगले कदम पर टिकी हैं.