नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है. उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड और एक जमानतदार देने को कहा गया था.
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने शुक्रवार को यह आदेश सुनाया. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए भी मजिस्ट्रेट को कुछ निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि नेहा बोरा को मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज और सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपना पक्ष प्रभावी तरीके से रख सकें.
क्या है मामला?
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जाते समय निवारक हिरासत में लिया गया था. अगले दिन 17 अक्टूबर को उन्हें रिहा कर दिया गया. इसके बाद SEM ने नोटिस जारी कर 10,000 रुपए का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने को कहा.
नोटिस में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मंडी हाउस पर जोर-जोर से नारेबाजी की, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन में हिस्सा लिया और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में अनधिकृत प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाया.
नेहा बोरा ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि नोटिस अस्पष्ट और गलत है. राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी.