नई दिल्ली: प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है. मेले के प्रशासन ने उन्हें संगम स्नान के दौरान रोक दिया था, जिसके बाद नोटिस-जवाब का सिलसिला शुरू हो गया. प्रशासन ने उनसे 'शंकराचार्य' पदवी के प्रमाण-पत्र मांगे हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार ज्योतिष पीठ पर अभी कोई आधिकारिक नियुक्ति नहीं मानी जाती.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस नोटिस को अपमानजनक करार दिया और कहा कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ है. उन्होंने जवाब में प्रशासन को कई पन्नों का पत्र भेजा, जिसमें भेदभाव का आरोप लगाया और पूछा कि पुरी के दो शंकराचार्यों के कैंप कैसे अनुमति मिली.
इस बीच, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने खुलकर उनका साथ दिया. उन्होंने कहा कि किसी शंकराचार्य से सर्टिफिकेट मांगना सनातन धर्म का सबसे बड़ा अपमान है.
अखिलेश यादव ने क्या कहा...
यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है, जहां विपक्ष बीजेपी पर साधु-संतों के अपमान का आरोप लगा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि नियमों का पालन कराया जा रहा है, किसी का अपमान नहीं किया गया. विवाद अभी जारी है और शंकराचार्य ने विरोध-प्रदर्शन भी किया है.