लखनऊ: CM योगी को कुर्सी से हटाने के लिए UP में तैयारी शुरू हो गई है. सपा कार्यालय में वो प्लान बना है जिसका अंदाजा आपको नहीं होगा. समाजवादी पार्टी के नेताओं की बैठक. बैठक में हुई बात साफ इशारा करती है कि कुछ बड़ा होने वाला है. अखिलेश यादव के कार्यकाल में महाकुंभ आज़म ख़ान ने करवाया था. केंद्र सरकार का बजट खर्च हुआ और राज्य सरकार का बजट सैफई कार्यक्रम में लगाया गया. योगी आदित्यनाथ ने 7400 करोड़ का बजट महाकुंभ के लिए जुटाया है...पर अखिलेश यादव और उनकी पूरी पार्टी महाकुंभ की तैयारियों पर पर थू-थू क्यों कर रही है?
वो इसलिए क्योंकि जब साल 2013 का महाकुंभ हुआ तो सपा प्रमुख ही यूपी के सीएम थे, तब आज़म खान मेला मंत्री बने. वहां से बात नहीं बनी तो अधिकारी भी मुस्लिम रखें गए. कहते हैं कि बीजेपी सरकार में जो महाकुंभ हो रहा है, वो इतिहास का सबसे अनोखा हो रहा है. पर सपा तैयारियों को लेकर सवाल उठा रही है. सपा से जुड़े सूत्र कहते हैं कि जैसे ही कोई मौका मिलेगा महाकुंभ की योजना को फेल बताने की पूरी तैयारी है. जैसे कोई हादसा हो जाए. जैसे किसी की मौत हो जाएगी तो वो समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा हो जाएगी.

31 दिसंबर 2024 को अखिलेश यादव ने एक व्यक्ति की मौत का मसला भी उठाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा. पूर्ण महाकुंभ में स्वास्थ्य सेवाओं की अग्रिम तैयारी के अभाव में, एक तीर्थयात्री की मृत्यु का समाचार दुखद है...सरकार तैयारी पर निगाह रखे और श्रद्धालुओं का जीवन बचाए, यही विनम्र आग्रह है...पर सच ये हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जब महाकुंभ हुआ तो 36 तीर्थ यात्रियों की भगदड़ में मौत हो गई. और आज़म खान से इस्तीफा तक नहीं लिया गया. सूत्र कहते हैं कि ये समाजवादी पार्टी के लिए एक मौका है, ये साबित करने के लिए कि योगी अच्छे सीएम नहीं है.
उनके कार्यकाल में महाकुंभ बेहतर नहीं हुआ है. साल 2013 के महाकुंभ में जब मॉरिशस के राष्ट्रपति यहां स्नान करने आए तब उन्होंने गंगा की अव्यवस्था देखी और आंसू बहाने लगे...इस बात का जिक्र खुद योगी ने किया था. सियासत में आंख बंद हो जाती है.. अखिलेश यादव ने एक पोस्ट में जो बात लिखी वो हैरान कर देती है, उन्होंने लिखा था कि बिना तार का खंभा खड़ा है. यहां लाइट लगनी है.

अब भाई पहले खंभा ही खड़ा होता है तब तार लगती है ये बात तो दुनिया जानती है. इस बार तो सोलर लाइट लगनी है तो तार का सवाल ही नहीं है. लेकिन आलोचना करनी हैं तो काम पूरा होने से पहले ही कर दिया. पर सच्चाई आपको सुनाते हैं. अखिलेश यादव 12 फरवरी 2013 को महाकुंभ गए थे. वहां गाड़ी से ही गंगा घाट का जायज़ा लेने पहुंचे और बिना स्नान किए ही वापस लौट आए थे.
आज अखिलेश यादव बेशक सवाल उठा रहे हैं लेकिन हालात ये थे कि उन्होंने 12 करोड़ लोगों की ज़िंदगी के लिए सिर्फ पांच गोताखोरों को रखा था. योगी ने पूरी फौज उतार दी है. य़े सरकारी रिपोर्ट दावा करती है कि अखिलेश यादव ने महाकुंभ पर ध्यान नहीं दिया था. उनके लिए ये आयोजन छोटा था. तो फिर वो योगी के आयोजन पर सियासत क्यों कर रहे हैं? जब जनता ने आपको सीएम बनाया था तब आपको बताना था पहले तार लगता है या पहले खंभा?