नई दिल्ली : अमरमणि त्रिपाठी की सियासी वापसी ने महराजगंज की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. करीब दो दशक बाद सार्वजनिक मंच पर पहुंचे पूर्व मंत्री ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह महराजगंज की फरेंदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे और पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी नौतनवा सीट से मैदान में उतरेंगे. हालांकि, दोनों किस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, इसका ऐलान अभी नहीं हुआ है.
अमरमणि का यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं. आनंदनगर में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक रिश्तों का हवाला देते हुए कहा कि उनका परिवार लंबे समय से जनता के बीच रहा है. उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में यह भी कहा कि कोई मुकाबले का हो तो बताओ.
अमरमणि त्रिपाठी की राजनीतिक पहचान पूर्वांचल के प्रभावशाली नेताओं में रही है. वह नौतनवा सीट से 1996, 2002 और 2007 में लगातार चुनाव जीत चुके हैं. मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के बाद उनका राजनीतिक सफर थम गया. 2003 में कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या हुई थी और 2007 में अमरमणि तथा उनकी पत्नी मधुमणि को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. करीब 19 साल से अधिक समय जेल में रहने के बाद दोनों अगस्त 2023 में रिहा हुए.
अब उनकी वापसी का सीधा असर फरेंदा और नौतनवा के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है. फरेंदा में कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी मौजूदा विधायक हैं, जबकि नौतनवा में 2022 में निषाद पार्टी के ऋषि त्रिपाठी ने जीत दर्ज की थी. अमनमणि 2017 में नौतनवा से निर्दलीय विधायक बने थे, लेकिन 2022 में तीसरे स्थान पर रहे.
यानी 2027 में त्रिपाठी परिवार की दोहरी एंट्री से महराजगंज की दोनों सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय और बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं.