नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया. इस विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी पर और अधिक सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है. हालांकि, विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन में हंगामे की स्थिति भी बनी रही.
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता को मजबूत करना चाहती है. प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक कराने वाले गिरोह, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले संगठनों, तकनीकी सेवा प्रदाताओं और अन्य दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है.
विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संगठित गिरोह प्रश्नपत्र लीक करने, उत्तर-पत्रों में छेड़छाड़ करने, फर्जी अभ्यर्थी बैठाने या परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम 3 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है. साथ ही 10 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है. यदि किसी संस्था या सेवा प्रदाता की भूमिका सामने आती है तो उसकी संपत्ति जब्त करने, परीक्षा से जुड़े अनुबंध रद्द करने और आर्थिक नुकसान की भरपाई वसूलने का प्रावधान भी किया गया है. मामलों की जांच समयबद्ध तरीके से होगी और फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई का भी प्रस्ताव है.
वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया. विपक्ष का कहना है कि केवल कानून को सख्त बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पेपर लीक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए.
सरकार का दावा है कि यह संशोधन कानून देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करने और पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा.