नई दिल्ली: अफगानिस्तान के बदख्शान प्रांत में तालिबान के खिलाफ एक नई सशस्त्र गुट ने पाकिस्तान की सीमा से सटे याफ्तल-ए-पाएन जिले के मुख्यालय पर हमला कर दिया. एंटी-तालिबान लड़ाकों ने दावा किया कि उन्होंने 17 जुलाई की सुबह जिले के प्रशासनिक भवन पर कब्जा कर लिया, तालिबानी कर्मियों को निहत्था किया और अपनी नई संगठन ‘सेपाहियान-ए-मिहान’ (Sepahian-e Mihan) का झंडा फहराया.
लड़ाके कई घंटों तक वहां रहे, इसके बाद वापस चले गए. तालिबान ने हमले को स्वीकार किया लेकिन इसे छोटी घटना बताते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने कुछ ही घंटों में जिले पर फिर से नियंत्रण कर लिया और कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया. अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार होगा, जब किसी जिले का मुख्यालय कुछ देर के लिए उनके हाथ से निकला हो.
कौन है यह नया गुट?
‘सेपाहियान-ए-मिहान’ (देश के सैनिक) नामक इस नए संगठन का नेतृत्व कय्यूम खान मलंग कर रहे हैं. वे पूर्व अफगान नेशनल आर्मी अधिकारी हैं, जिन्होंने अमेरिकी डेल्टा फोर्स के साथ काम किया था. बाद में वे अहमद मसूद की नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (NRF) से जुड़े और अब अपना अलग गुट चलाते हैं. तालिबान के आर्मी चीफ ने इसे महज प्रचार की चाल बताया और कहा कि ऐसे छोटे-छोटे गुट सुरक्षा बलों के सामने कुछ नहीं कर सकते.
यह प्रांत ताजिकिस्तान, चीन और पाकिस्तान (भारत के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र) से लगा हुआ है. वाखान कॉरिडोर यहां से चीन को जोड़ता है, जिसकी वजह से क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा है. यह घटना तालिबान शासन के खिलाफ छोटे-छोटे सशस्त्र विरोधों के जारी रहने का संकेत देती है, हालांकि फिलहाल तालिबान का नियंत्रण पूरे देश में मजबूत माना जाता है.