12% और 28% GST स्लैब खत्म करने की मंजूरी, 90% सामान हो सकते हैं सस्ते

Amanat Ansari 21 Aug 2025 05:15: PM 2 Mins
12% और 28% GST स्लैब खत्म करने की मंजूरी, 90% सामान हो सकते हैं सस्ते

नई दिल्ली: वस्तु और सेवा कर (GST) में बहुप्रतीक्षित सुधार की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा है. GST दरों के युक्तिकरण पर गठित मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने GST स्लैब की संख्या कम करने पर सहमति जताई है. गुरुवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में, राज्य मंत्रियों के इस पैनल ने केंद्र सरकार के चार-दर प्रणाली को घटाकर दो मुख्य स्लैब - 5% और 18% - करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. इस कदम को GST 2.0 की शुरुआत माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, अनुपालन में आसान और घरेलुओं व व्यवसायों पर कम बोझ डालने वाला बनाना है.

वर्तमान में, GST चार अलग-अलग दरों पर लागू होता है: 5%, 12%, 18% और 28%. नई संरचना के तहत, 12% और 28% स्लैब को खत्म कर दिया जाएगा. अब अधिकांश वस्तुएं और सेवाएं 5% या 18% स्लैब के तहत आएंगी. तंबाकू और कुछ लग्जरी वस्तुओं जैसे "सिन गुड्स" पर 40% की उच्च दर जारी रहेगी. पैनल ने यह भी सुझाव दिया कि लग्जरी कारों को 40% कर दायरे में लाया जाए. योजना के अनुसार, पहले 12% कर स्लैब में शामिल 99% वस्तुएं अब 5% के निचले स्लैब में आएंगी. इसी तरह, 28% स्लैब की लगभग 90% वस्तुएं 18% स्लैब में स्थानांतरित होंगी.

जीओएम की अध्यक्षता बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की. अन्य सदस्यों में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और केरल के वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल शामिल थे.
वित्त मंत्रालय के विस्तृत प्रस्तावों की समीक्षा के बाद मंत्रियों ने व्यापक सहमति बनाई.

उपभोक्ताओं के लिए बचत

केंद्र सरकार ने कहा कि नई संरचना से घरेलुओं, किसानों और मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी, क्योंकि रोजमर्रा की वस्तुओं पर GST दर कम होगी. दवाइयां, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, कपड़े, जूते और कई घरेलू उत्पादों को 5% स्लैब में लाने की उम्मीद है. बड़े घरेलू उपकरण, टेलीविजन और अन्य टिकाऊ सामान अब 28% के बजाय 18% दर के तहत आएंगे, जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए कीमतें कम हो सकती हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले जीओएम को बताया था, "दरों का युक्तिकरण आम आदमी, किसानों, मध्यम वर्ग और एमएसएमई को अधिक राहत देगा, साथ ही एक सरल, पारदर्शी और विकास-उन्मुख कर व्यवस्था सुनिश्चित करेगा."

बीमा पर GST छूट की समीक्षा

जीओएम ने व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा को GST से छूट देने के केंद्र के प्रस्ताव पर भी चर्चा की. यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो पॉलिसीधारकों को अपने प्रीमियम पर GST नहीं देना होगा. अधिकारियों का अनुमान है कि इस छूट से सरकार को हर साल लगभग 9,700 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है. अधिकांश राज्यों ने इस विचार का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने यह भी मांग की कि बीमा कंपनियां इस लाभ को ग्राहकों तक पहुंचाएं, न कि प्रीमियम को अपरिवर्तित रखें.

जीओएम की सिफारिशें अब GST काउंसिल को भेजी जाएंगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करती हैं और इसमें सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं. काउंसिल अपनी आगामी बैठक में इन प्रस्तावों की समीक्षा करेगी और अंतिम फैसला लेगी. यदि मंजूरी मिलती है, तो यह 2017 में GST लागू होने के बाद से सबसे बड़े सुधारों में से एक होगा. सरकार का मानना है कि दो-स्लैब वाली सरल प्रणाली व्यवसायों के लिए अनुपालन को आसान बनाएगी और उपभोक्ताओं के लिए कर का बोझ कम करेगी.

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