नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने युवा पीढ़ी (Gen-Z) से आह्वान किया है कि वे नीट परीक्षा के पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें. केजरीवाल ने कहा कि अगर बांग्लादेश और नेपाल के युवा सड़कों पर उतरकर अपनी सरकारों में बदलाव ला सकते हैं, तो भारतीय Gen-Z भी परीक्षा घोटालों में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहरा सकता है.
उन्होंने पूछा- क्या हमारे युवा पेपर लीक में संलिप्त मंत्रियों को जेल भेजने के लिए दबाव नहीं बना सकते? बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने कहा कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से छात्रों का आत्मविश्वास पूरी तरह टूट गया है. उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले के कई मामलों में CBI को जांच सौंपी गई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.
उन्होंने दावा किया कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक 93 बार विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं. इनमें से अधिकांश भाजपा शासित राज्यों में हुए हैं, जिससे करीब 6 करोड़ युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है.
केजरीवाल ने कहा, “2017, 2021 और 2024 में भी पेपर लीक हुए थे. CBI को केस दिए गए, लेकिन क्या हुआ? इस बार भी CBI जांच कर रही है, उम्मीद है कि इस बार भी कुछ नहीं होगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि CBI उन लोगों के इशारे पर काम करती है जो खुद इन घोटालों में शामिल हैं.
उन्होंने विशेष रूप से भाजपा शासित राज्यों- राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात का जिक्र करते हुए कहा कि ज्यादातर घटनाएं इन्हीं राज्यों में हुई हैं. इस बार नीट पेपर लीक का मुख्य केंद्र भी राजस्थान बताया जा रहा है. इससे शक पैदा होता है कि क्या इसमें सत्ताधारी दल के लोग भी शामिल हैं?
कौन हैं Gen-Z?
Gen-Z उस युवा वर्ग को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच जन्मा है. ये डिजिटल युग में बड़े हुए हैं और सोशल मीडिया, इंटरनेट व स्मार्टफोन इनका अभिन्न हिस्सा हैं. केजरीवाल का मकसद Gen-Z को जागरूक कर इन्हें परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करना है.