Bharat Tiwari Encounter : भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. मुख्यमंत्री की ओर से मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा के बावजूद विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है. इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी का बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अश्विनी चौबे ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी व्यक्ति को बिना निष्पक्ष जांच के अपराधी घोषित नहीं किया जा सकता और पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का ऐसा रुख यह दर्शाता है कि भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी असहजता मौजूद है.
दूसरी ओर विपक्ष, खासकर तेजश्वी यादव, लगातार इस मामले को फर्जी एनकाउंटर बताकर सरकार को घेर रहे हैं. भरत तिवारी के परिजनों पर दर्ज एफआईआर और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. ऐसे माहौल में अश्विनी चौबे का बयान विपक्ष के आरोपों को अतिरिक्त राजनीतिक बल देता दिखाई दे रहा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के भीतर से उठ रही आवाजें सरकार पर जांच को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ाएंगी. यही वजह है कि मुख्यमंत्री द्वारा सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज से न्यायिक जांच कराने का फैसला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आने वाले दिनों में न्यायिक जांच की दिशा और निष्कर्ष तय करेंगे कि यह मामला केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित रहेगा या बिहार की राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच बड़े टकराव का कारण बनेगा. फिलहाल, अश्विनी चौबे के बयान ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि भरत तिवारी एनकाउंटर का राजनीतिक असर अभी लंबे समय तक देखने को मिल सकता है.