रामपुर : सलाखों के पीछे आजम खान का दम घुटता है. बीवी तंजीन से दुख बांटते हैं, बेटे से बाहर का हाल पूछते हैं. पहले मिली ख़बर, योगी सरकार ने सरकारी वकीलों को हटा दिया, जश्न मनाने से पहले ही नई आफत टूट पड़ी. 11 बार के विधायक-सांसद रहे आजम खान की नई पहचान अब कैदी नंबर 425 है, नवंबर 2025 से उनका नया ठिकाना रामपुर जेल हो गया, जो आलीशान घर उन्होंने बनवाया था.
उसमें अब सिर्फ उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बड़े बेटे के साथ बाकी परिवार रहता है, जो इस उम्मीद में आजम खान से मिलने बार-बार जेल पहुंचता है कि वो वहां से कब छूटेंगे. जबकि, आजम के हाथों सताए गए लोग ये दुआं करते हैं कि ये आदमी कभी जेल से बाहर न आए, लेकिन ये लेटर जैसे ही सामने आया. हर तरफ चर्चा होने लगी कि आजम खान केस में सरकार की पैरवी अब कमजोर हो सकती है, क्योंकि योगी सरकार ने एक साथ इस केस से जुड़े 6 सरकारी वकीलों को हटाने का फैसला लिया है, जिनके नाम है अमित कुमार सक्सेना, संदीप सक्सेना, प्रमोद सागर,ओमप्रकाश लोधी,प्रताप सिंह मौर्य और अमित कुमार.
ये फौजदारी और दीवीनी के सीनियर वकील कहे जाते हैं, फिर इन्हें हटाने का फैसला अचानक क्यों लिया गया, क्या कोई बड़ा खेल होने वाला है. या फिर ये हो सकता है कि आने वाले दिनों में वकीलों का एक मजबूत पैनल फिर से बने और आजम पर लगे आरोपों को साबित करने की कोशिशें तेज हो, पर मुकदमों का शतक लगाने वाले आजम अगर कई आरोपों में छूट भी जाएं तो नए आरोपों का क्या होगा.
फिलहाल उनके खिलाफ 450 करोड़ के मामले में एक नया नोटिस जारी हुआ है, और ये नोटिस जारी किया है इनकम टैक्स विभाग ने. जिसका सीधा सा मतलब है अब रामपुर के आजम की फाइल दिल्ली तक पहुंच सकती है.
कुछ साल पहले आजम खान और उनके करीबियों के ठिकानों पर इनकम टैक्स ने छापेमारी की थी, उस दौरान 450 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया था, टैक्स बचाने का खेल रचा गया. सीपीडब्ल्यूडी ने कहा जौहर यूनिवर्सिटी में 494 करोड़ खर्च हुए, जबकि ट्रस्ट ने कहा सिर्फ 46 करोड़ लगे थे.
जिसका मतलब बड़ी चोरी पकड़ी जा सकती है, और फिर केस भी लंबा हो सकता है , तब आजम शायद ये न कहें कि मुझे बकरी चोरी, मुर्गी चोरी जैसे केस में जेल हुई. क्योंकि, जो काम उन्होंने सत्ता के हनक में किए हैं, वो आज भी रामपुर की जनता भूल नहीं पाती. हालांकि, कई लोग ये भी कहते हैं अखिलेश यादव अगर चाहते तो इस उम्र में आजम को बचा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, रामपुर से लेकर लखनऊ तक इस बात की चर्चा रहती है कि एक-एक कर मुलायम दौर के नेताओं को अखिलेश ने बड़ी ही तरीके से किनारे लगाया, इसीलिए 2027 चुनाव से पहले आजम जेल से बाहर आएंगे या नहीं.
ये सवाल भी यूपी की सियासत में गूंजने लगा है. आजम जब पहली बार छूटे थे तब वो अपने जेल के दिन याद कर रोने लगे थे, और इस बार तो वो ऐसी जगह बंद हैं, जहां उनके बैरक से घर की दूरी करीब 300 मीटर होगी, मोहल्ले की मस्जिद में अजान होती है तो उसकी आवाज आजम को जेल के भीतर भी सुनाई देती होगी.
घर की याद ज्यादा सता रही होगी और बुढ़ापे में सलाखों के पीछे आजम की हालत ठीक ऐसी हो गई होगी कि उन्हें वो दौर याद आ रहा होगा, जब सत्ता की हनक में सही और गलत का उचित फैसला नहीं कर पाए.