Prashant Kishor Win Factor : बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर की जीत हुई.एक नए बहस का जन्म हो गया. क्या सम्राट को सीएम बनना बीजेपी को भारी पड़ा. इस एक सवाल का जवाब गोरखपुर की लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव से मिलता है. योगी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दिया, बीजेपी सपा गठबंधन के आगे पस्त हो गई, बीजेपी उस गोरखपुर में हारी जहां से BJP की हार का ख़्वाब विपक्ष अक्सर देखता था, क्योंकि उस चुनाव में संजय निषाद की पार्टी का गठबंधन सपा के साथ हुआ और बीजेपी वैसा उम्मीदवार नहीं उतार पाई जो मुकाबला कर पाए. ठीक ऐसा ही होता है बांकीपुर उपचुनाव में. बीजेपी उम्मीदवार बदलती है. नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाती है, मानो बीजेपी अपने इस गढ़ को बचाना नहीं बल्कि ख़ुद हारना चाहती हो.
पहला फ़ैक्टर था प्रशांत किशोर का ख़ुद का चेहरा, बिहार की जनता बदलाव के मूड में नज़र आई, ये भी जनता जानती है कि एक सीट ऐसे उम्मीदवार को देनी चाहिए जो बिहार में नई राजनीति का रास्ता खोल सकता है. जबकि दूसरी वजह बनी तेजस्वी को मिलने वाले मुस्लिम-यादव वोट का प्रशांत किशोर की झोली में जाना, तीसरी वजह बनी, प्रशांत किशोर ने पूरा चुनाव लोकल मुद्दे पर लड़ा, जनता को ये पसंद आया.
प्रशांत कुमार की जीत के साथ ये बहस शुरु हो गई कि बीजेपी ने आरजेडी के लिए एग्जिट डोर खोल दिया है. क्योंकि प्रशांत की जीत में आरजेडी की हार भी छिपी है, लालू प्रसाद यादव की पार्टी जिस बिहार में राज़ करती थी वहां आज नंबर तीन पर पहुँच गई, क्या आने वाले विधानसभा चुनाव में आरजेडी और बीजेपी नहीं बल्कि जन सुराज और बीजेपी के बीच टक्कर होगी. बांकीपुर सीट से ही बीजेपी के वर्तमान अध्यक्ष नितिन नवीन विधायक थे, इस चुनाव में अपने प्रत्याशी के लिए ख़ुद रोड शो करने तेजस्वी यादव पहुंचे थे. यानि बिहार ने ये साफ़ कर दिया है कि अब बीजेपी के बदले जनता आरडेजी को दूसरा विकल्प नहीं मानती है.
विधानसभा चुनाव के दौरान सीमांचल क्षेत्र में ओवैसी की पार्टी ने ठीक ऐसी ही पटकनी आरजेडी को दी थी, वहां ओवैसी ने यही साबित किया था कि अगर आरजेडी का विकल्प कोई बने तो जनता लालू के जंगलराज़ को एक वोट नहीं देगी. यानि सियासी समीकरण बिहार के बदल चुके है. जेन जी प्रोटेस्ट के बाद ये देश का पहला उपचुनाव था, बीजेपी की हार सिर्फ बिहार के बांकीपुर में ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के दतिया में भी हुई, ये जनादेश बीजेपी से ज्यादा तेजस्वी को हैरान कर रहा है, प्रशांत किशोर अपनी पार्टी के इकलौते विधायक होंगे लेकिन सदन में बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे. एक सीट की जीत ने पूरा समीकरण बदल दिया.
प्रशांत किशोर का क़द बिहार में जितना बड़ा होगा बीजेपी को बिहार में उतने लंबे वक्त तक की सत्ता नसीब होगी. वजह है आरजेडी और जनसुराज के बीच टक्कर और मलाई बीजेपी की होगी. प्रशांत की जीत के बाद तेजस्वी के परिवार की बौखलाहट देखी जा सकती है. लालू की बेटी मीसा यादव कहती है कि बीजेपी ने कुत्ते-बिल्ली के बजाय लोमड़ी को उम्मीदवार बना दिया.
प्रशांत किशोर की जीत क़रीब 20 हज़ार वोट से ज्यादा की है, जो साफ़ दर्शाता है कि ये जीत प्रशांत किशोर की है लेकिन हार सम्राट चौधरी की नहीं बल्कि तेजस्वी की है. क्योंकि विपक्ष में रहने वाली पार्टी का वजूद ख़तरें में है और बीजेपी प्रशांत किशोर को सदन में देखकर परेशान नहीं बल्कि आगे की रणनीति पर फ़ोकस होगी.