डबल A ने बिगाड़ा तेजस्वी का गेम, 4 मिनट में कैसे पलटा आरजेडी का प्लान, देखकर लालू भी हुए हैरान

Global Bharat 13 Feb 2024 11:34: AM 3 Mins
डबल A ने बिगाड़ा तेजस्वी का गेम, 4 मिनट में कैसे पलटा आरजेडी का प्लान, देखकर लालू भी हुए हैरान

नीतीश कुमार ने 129 वोटों के साथ बहुमत साबित कर सरकार बचा ली, लेकिन 4 मिनट के भीतर आरजेडी का 24 घंटे वाला प्लान उन्होंने कैसे पलटा, ये ज्यादातर लोग नहीं समझ पाए। पर ये बताएं उससे पहले सुनिए वो तीन बाहुबली नेता कौन हैं, जिनकी वजह से नीतीश की सरकार बच गई। और इन्होंने तेजस्वी का साथ क्यों छोड़ा। 

इनमें पहला नाम है, आनंद मोहन का, जिनके बेटे चेतन आनंद आरजेडी से विधायक हैं, पर वोट बीजेपी-जेडीयू की सरकार के पक्ष में किया। ऐसी चर्चा है कि चेतन आनंद ने ये फैसला अपने पिता को दोबारा जेल जाने से बचाने के लिए लिया है। 

जबकि दूसरा नाम है नीलम देवी का। जो मोकामा से लंबे वक्त तक विधायक रहे बाहुबली नेता अनंत सिंह की पत्नी हैं। इन्होंने भी क्रॉस वोटिंग की है। फिलहाल अनंत सिंह जेल में हैं, अब पत्नी चूंकि सत्ता पक्ष के साथ चली गई हैं, तो इसका फायदा अनंत सिंह को मिल सकता है और जेल से छूट भी सकते हैं।

इसके अलावा तीसरा नाम है बालू कारोबारी और दर्जनों मामलों के आरोपी प्रहलाद यादव का। लखीसराय और आसपास के जिले में इनकी छवि दबंग वाली है, अब अगर सत्ता पक्ष के साथ रहे तो मुकदमे  में थोड़ी ढील मिल सकती है, और ये सबको पहले से पता था कि तेजस्वी के साथ रहकर कुछ खास हाथ लगने वाला नहीं है, क्योंकि नीतीश की सरकार गिराना संभव नहीं है, इसलिए विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही पाला बदल लिया।

हालांकि तेजस्वी यादव ने तब भी विरोध जताया कि ये विधानसभा की परंपरा के खिलाफ है, क्योंकि स्पीकर अवध बिहारी चौधरी को हटाए जाने का प्रस्ताव जैसे ही आया, आरजेडी के तीनों विधायक एनडीए खेमे में बैठे नजर आए, जो नियम के हिसाब से गलत है, पार्टी व्हीप के खिलाफ जाने के बाद पार्टी उनकी सदस्यता भी रद्द कर सकती है। पर सदस्यता से ज्यादा बड़ा सवाल इन तीनों विधायकों के लिए अपनी सुरक्षा का था, और नीतीश जब अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए बार-बार गठबंधन बदल सकते हैं तो फिर विधायकों की क्रॉस वोटिंग उस हिसाब से कौन सी बड़ी बात है। 

ये वही तीन विधायक हैं, जिनकी वजह से आरजेडी ने बहुमत परीक्षण के लिए वोटिंग होने से पहले ही विधानसभा से वॉकआउट कर लिया, वरना उनकी मंशा तो यही थी कि कुछ विधायकों को जोड़-तोड़ करके नीतीश की सरकार गिरा दी जाए और इसकी प्लानिंग भी पूरी तरह से लालू यादव के साथ मिलकर तेजस्वी ने बना ली थी। पर ऐन मौके पर बड़ा खेल हो गया। 11 फरवरी की रात 10 बजे से बिहार के बाहुबली विधायक आनंद मोहन के बड़े बेटे की शिकायत पर बिहार पुलिस के दर्जनों जवान तेजस्वी आवास पहुंचते हैं, चेतन आनंद को ढूंढते हैं। पर कुछ हाथ नहीं लगता। उसके बाद रात करीब ढाई बजे वो फिर से घर में छापा मारते हैं और चेतन आनंद को ढूंढकर ले जाते हैं, तेजस्वी और आरजेडी के विधायक देखते रह जाते हैं और चेतन आनंद को पुलिसकर्मी पकड़कर ले जाते हैं, तभी ये तय हो जाता है कि तेजस्वी जिस खेला का दावा कर रहे थे, वो अब नहीं होगा और नीतीश कुमार की कुर्सी सुरक्षित रहेगी, क्योंकि तेजस्वी अपने ही विधायकों को बचाने में फेल रहे हैं। 

सियासी जानकार कहते हैं कि दिल्ली में बैठे अमित शाह और बिहार में बैठे लालू यादव सियासत के ऐसे मंझे हुए खिलाड़ी हैं, जिनके सियासी गुणा-गणित के आगे बड़े-बड़े दिग्गज फेल हो जाते हैं। इस बार भी यही उम्मीद थी कि जैसे बिहार में लालू ने आडवाणी को गिरफ्तार कर राम मंदिर आंदोलन का रूख बदल दिया था, वैसे ही इस बार उनके लाल तेजस्वी यादव भी कुछ बड़ा करेंगे, बीजेपी की रणनीति फेल कर देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, और अब तेजस्वी की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं, क्योंकि विधानसभा में खड़े होकर सीएम नीतीश ने साफ ऐलान कर दिया है कि जिसने भी विधायकों को विधानसभा से बाहर रखने की कोशिश की है, हमारे 5 विधायकों को जिन्होंने भी छिपाया, उनके खिलाफ एक्शन लूंगा।

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