चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दल का समर्थन नहीं करेगी और स्वतंत्र रूप से अपनी भूमिका निभाएगी. पार्टी का सिर्फ एक विधायक जीतकर आया है, जिससे AIADMK के साथ उसके संबंधों में और दूरी साफ नजर आ रही है. सवाल उठ रहा है कि क्या यह डीएमके और AIADMK के बीच गठबंधन की संभावना को मजबूत करता है?
2026 के चुनाव में बीजेपी ने मात्र 27 सीटों पर लड़ाई लड़ी और सिर्फ उधगमंडलम (ऊटी) सीट पर एम. भोजराजन के रूप में एकमात्र जीत हासिल की. यह 2021 के चार सीटों से काफी गिरावट है. पार्टी के कई बड़े नेता हार गए, जिससे उसकी ताकत सीमित हो गई है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अब किसी बड़े गठबंधन या समर्थन में शामिल होने के बजाय अपनी स्वतंत्र रणनीति पर चलेगी.
AIADMK के साथ पिछले संबंधों के बावजूद, इस बार दोनों के बीच दूरी साफ दिख रही है. AIADMK ने 47 सीटें जीती हैं, जबकि थलापति विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है (लगभग 108 सीटें). डीएमके को 59 सीटें मिली हैं. नतीजा: 234 सदस्यीय सदन में कोई भी स्पष्ट बहुमत (118) के करीब नहीं पहुंच पाया.
क्या DMK-AIADMK गठबंधन का संकेत?
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि बीजेपी की यह तटस्थता और AIADMK से दूरी डीएमके और AIADMK के बीच अप्रत्याशित पोस्ट-पोल समझौते की अटकलों को हवा दे रही है. दोनों द्रविड़ पार्टियां ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं, लेकिन TVK के उभार को रोकने के लिए कुछ रिपोर्ट्स में उनके बीच बातचीत की खबरें आ रही हैं.