कहते हैं बीजेपी हमेशा एक कदम आगे की सोचती है, आप जो सोचेंगे भी नहीं वो कर दिखाता ही और 2024 चुनाव में कुछ ऐसा ही होने वाला है, अब तक भगवान राम के मुद्दे पर चुनाव लड़ती आई इस बार सीधा श्रीराम को चुनावी दंगल में उतारने की तैयारी में है।
ये श्रीराम रामानंद सागर के रामायण वाले हैं, जिनकी घर-घर में पहचान भगवान राम वाली ही है, एयरपोर्ट हो या बस स्टैंड जहां भी जाते हैं लोग उनके पांव पड़ने लगते हैं, और इस बार चर्चा है कि बीजेपी उन्हें यूपी की मेरठ सीट से उम्मीदवार बना सकती है। अगर ऐसा हुआ तो फिर समझिए कि रैलियों में वाल्मीकि रामायण के मंत्र भी सुनाई दे सकते हैं।
अरुण गोविल की छवि जनता के बीच काफी अच्छी है, जिसका फायदा बीजेपी इस चुनाव में उठाना चाहेगी, हालांकि मेरठ सीट से फिलहाल बीजेपी के राजेन्द्र अग्रवाल सांसद हैं। राजेन्द्र अग्रवाल बीते तीन बार से लगातार सांसद हैं, पर इस बार टिकट कटना तय है।
अगर अरुण गोविल चुनावी मैदान में आए तो जीत आसान हो सकती है। ऐसी ख़बरें है कि बीजेपी की दूसरी लिस्ट में अरुण गोविल का नाम आ सकता है। इससे पहले 2 मार्च को पहली लिस्ट जारी हुई थी, जिसमें यूपी के 51 उम्मीदवारों का नाम था, उसके बाद आरएलडी ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया, अपना दल (एस) ने दो सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए और फिर ओपी राजभर ने मंत्री पद की शपथ लेने के अगले ही दिन अपने बेटे अरविंदर राजभर को प्रत्याशी बना दिया, ये वही घोसी सीट है, जहां से दारा सिंह चौहान जैसे कद्दावर नेता पाला बदलने के बाद हार गए, पर इस बार चूंकि दारा सिंह चौहान भी योगी मंत्रिमंडल में शामिल हो चुके हैं, तो राजभर के बेटे की जीत आसान हो सकती है।
पिछली बार ये सीट बसपा के खाते में आई थी, फिलहाल बसपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। लेकिन ये मानकर चला जा रहा है कि बसपा की वजह से इस बार बीजेपी को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचने वाला। अगर बीजेपी को नुकसान पहुंचेगा तो सिर्फ उन नेताओं से, जिनसे जनता नाराज है और एक ऐसे ही नेता हैं बृजभूषण शरण सिंह, जो कैसरगंज से सांसद हैं।
महिला पहलवानों ने इनके ऊपर गंभीर आरोप लगाए, उसके बाद ये चर्चा तेज हो चली कि बृजभूषण शरण सिंह का टिकट इस बार कटने वाला है, पर बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि बृजभूषण को नाराज करके ये सीट जीतना आसान नहीं होगा। बृजभूषण की पकड़ कैसरगंज के अलावा, गोंडा, बहराइच और कई बड़े जिलों में है, इसीलिए इसका तोड़ निकालते हुए बीजेपी हाईकमान बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण को टिकट देने पर विचार कर रहा है। हो सकता है बृजभूषण के बेटे पर बात नहीं बनी तो उनके किसी समर्थक को ही टिकट दे दिया जाए।
हालांकि जब तक दूसरी लिस्ट नहीं आ जाती, कुछ भी कहना मुश्किल है, कई मीडिया रिपोर्ट में इस तरह के दावे किए जा रहे हैं कि 6 मार्च को हुई बैठक में बीजेपी हाईकमान ने इसकी लिस्ट तैयार कर ली है कि यूपी की बाकी बची 24 सीटों पर किसे टिकट दिया जाएगा। बस उस लिस्ट पर मोदी-शाह की सहमति का इंतजार है।
सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि वरुण गांधी और मेनका गांधी के अलावा कई ऐसे सांसदों का टिकट भी कटने वाला है, जिनका रिपोर्ट कार्ड खराब है, और पहली लिस्ट में चूंकि सिर्फ 51 में से 4 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे गए थे, इसलिए इस बार नए उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा हो सकती है, क्योंकि बीजेपी का विजन राजनीति में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को आगे लाना है, सर्वे के हिसाब से जो फिट बैठेगा, उसे टिकट मिलेगा और जिसका रिपोर्ट कार्ड खराब होगा, उसे बाहर का रास्ता देखना होगा।