बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नंदीग्राम में भाजपा की बड़ी हार, एक भी सीट नहीं मिली

Amanat Ansari 19 Jan 2026 01:20: PM 1 Mins
बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नंदीग्राम में भाजपा की बड़ी हार, एक भी सीट नहीं मिली

वोटर के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण सहकारी समिति चुनाव

12 सीटों के लिए मतदान हुआ, सभी सीटें टीएमसी ने जीती

बीजेपी के साथ-साथ वाम मोर्चा को एक भी सीट नहीं मिली

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में हाल ही में एक महत्वपूर्ण सहकारी समिति चुनाव हुआ, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बड़ा उलटफेर करते हुए सभी सीटों पर कब्जा जमाया.  यह चुनाव अमदाबाद समबाय कृषि उन्नयन समिति लिमिटेड के लिए था, जो अमदाबाद ग्राम पंचायत के अंतर्गत आती है. यहां कुल 12 सीटों के लिए मतदान हुआ और टीएमसी ने सभी 12 सीटें जीत लीं. बीजेपी और वाम मोर्चा को एक भी सीट नहीं मिली.

सुवेंदु अधिकारी का गढ़ है यह इलाका

यह नतीजा इसलिए खास मायने रखता है क्योंकि नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी का गढ़ माना जाता है. 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने इसी सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था. इस सहकारी समिति का इतिहास भी रोचक है. पहले यह सीपीआई(एम) का मजबूत आधार हुआ करती थी, लेकिन लंबे समय से यहां चुनाव नहीं हुए थे.

2011 से लगातार काम कर रही थी TMC

2011 में राज्य में सत्ता बदलने के बाद से टीएमसी लगातार इस इलाके में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में जुटी थी.  रविवार को हुए इस चुनाव में तीनों प्रमुख दलों के बीच जोरदार मुकाबला रहा. सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और नतीजे देर शाम घोषित हुए.  टीएमसी नेताओं ने इसे पूर्वी मेदिनीपुर जिले में पार्टी की बढ़ती ताकत का सबूत बताया. पार्टी के एक स्थानीय महासचिव ने कहा कि यह क्लीन स्वीप दिखाता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इलाके में जनसमर्थन का रुख बदला है और बीजेपी अपनी पकड़ खो रही है. उन्होंने इसे बीजेपी के लिए एक बड़ा संकेत बताया.

भाजपा को विधानसभा चुनाव में आस 

दूसरी ओर, बीजेपी ने टीएमसी की इस व्याख्या को जल्दबाजी करार दिया. पार्टी के एक जिला स्तर के पदाधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम की अन्य कई सहकारी समितियों में बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा है. उनका कहना है कि सिर्फ एक समिति का परिणाम पूरे क्षेत्र की राजनीतिक हवा को नहीं दर्शाता. असली तस्वीर तो विधानसभा चुनाव के दौरान ही साफ होगी.  यह घटना चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच बढ़ती सियासी जंग का संकेत दे रही है.

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