नई दिल्ली: बीएमसी चुनाव (15 जनवरी 2026) से ठीक पहले मुंबई की राजनीति में तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है. यह सब तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु के भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर (International city) बताया, जिसे महाराष्ट्र से अलग करके देखा गया. रविवार को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे की संयुक्त रैली में राज ठाकरे ने अन्नामलाई पर तगड़ा हमला बोला.
उन्होंने उन्हें मजाक में रसमलाई कहकर संबोधित किया और पूछा कि तमिलनाडु से आए किसी का मुंबई से क्या लेना-देना? साथ ही उन्होंने अपने चाचा बाल ठाकरे के पुराने नारे हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी का जिक्र किया, जो 1960-70 के दशक में दक्षिण भारतीयों के खिलाफ इस्तेमाल हुआ था. राज ठाकरे ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश-बिहार से आए लोग अगर हिंदी थोपने की कोशिश करेंगे तो उन्हें लात मारकर बाहर निकाला जाएगा.
उन्होंने मराठी भाषी लोगों से अपील की कि जमीन और भाषा बचाओ, वरना मराठी अस्मिता खत्म हो जाएगी. उन्होंने बीएमसी चुनाव को मराठी मानूस का आखिरी मौका बताया. इसके जवाब में सोमवार को चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में के. अन्नामलाई ने करारा पलटवार किया. उन्होंने कहा, ''मुझे धमकियां मिल रही हैं कि मुंबई आया तो पैर काट दिए जाएंगे. मैं एक किसान का बेटा हूं. डरता तो गांव में ही रहता. मैं मुंबई जरूर आऊंगा. हिम्मत है तो मेरे पैर काटकर दिखाओ.''
उन्होंने आगे कहा, आदित्य और राज ठाकरे मुझे धमकी देने वाले कौन होते हैं? उन्होंने तो सिर्फ गालियां देने के लिए सभाएं कीं. अगर मैं कहता हूं कि कामराज महान नेता थे, तो क्या वे तमिल नहीं रहते? वैसे ही मुंबई को वर्ल्ड क्लास सिटी कहने से क्या मराठियों का योगदान खत्म हो जाता है? ये लोग सिर्फ नासमझी फैला रहे हैं.''
यह विवाद अब क्षेत्रीय अस्मिता, भाषा और बाहरी बनाम स्थानीय की पुरानी बहस को फिर से जगा रहा है. भाजपा ने राज ठाकरे के बयान को नफरती बताया है, जबकि ठाकरे खेमे इसे मराठी हितों की रक्षा बता रहा है. चुनाव नजदीक है, तो यह तनातनी और बढ़ सकती है.