ढाका: बांग्लादेश के कुमिला जिले के मुरादनगर उपजिला में एक 27 वर्षीय हिंदू महिला के साथ बलात्कार की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. इस मामले में मुख्य आरोपी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के स्थानीय नेता फजोर अली (36) को गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर इस जघन्य अपराध का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल किया. यह घटना 26 जून 2025 को हुई और अगले दिन, 27 जून को वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया, जिसने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया.
पुलिस के अनुसार, फजोर अली, जो रामचंद्रपुर पंचकिट्टा गांव का रहने वाला है, ने 26 जून की रात करीब 11 बजे पीड़िता के घर में जबरन घुसकर उसके साथ बलात्कार किया. पीड़िता, जो अपने पति के विदेश में होने के कारण अपने दो बच्चों के साथ अपने पिता के घर में रह रही थी, उस समय अकेली थी. वह स्थानीय हरि सेवा उत्सव के लिए अपने पिता के घर आई थी. पुलिस ने बताया कि फजोर अली ने पीड़िता के दरवाजा न खोलने पर जबरदस्ती घर में प्रवेश किया और अपराध को अंजाम दिया. स्थानीय लोगों ने फजोर अली को पकड़कर उसकी पिटाई की, लेकिन वह भागने में सफल रहा. इस दौरान कुछ लोगों ने पीड़िता का एक अश्लील वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वह अपनी इज्जत बचाने की गुहार लगा रही थी. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया.
वीडियो के वायरल होने के बाद ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए समर्पित जगन्नाथ हॉल के निवासियों ने रविवार को कैंपस में विरोध मार्च निकाला. उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भी इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों के लिए कठोर सजा की मांग की. हालांकि, बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने दावा किया कि इस घटना के जरिए उनकी पार्टी की छवि खराब करने की साजिश की जा रही है.
कुमिला जिले के पुलिस प्रमुख नजीर अहमद खान ने बताया कि फजोर अली को ढाका के सायेदाबाद क्षेत्र में रविवार तड़के 5 बजे गिरफ्तार किया गया. चार अन्य लोगों को वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है. मुरादनगर पुलिस स्टेशन में महिला और बाल उत्पीड़न निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. बांग्लादेश हाई कोर्ट ने भी इस मामले में तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया है और वायरल वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने का निर्देश दिया. साथ ही, पीड़िता की सुरक्षा और आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है.
यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की एक और कड़ी है. 5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से देश में हिंदुओं और उनके संपत्तियों पर हमले बढ़े हैं. बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के अनुसार, 45 जिलों में हिंदुओं पर 2,010 से अधिक हमले हुए हैं, जिनमें पांच हिंदुओं की हत्या शामिल है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 27 जून को एक प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी.
इस घटना ने न केवल बांग्लादेश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की है. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और यूनुस सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है. यह मामला बांग्लादेश में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों को उजागर करता है, जिसके लिए सरकार को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत है.
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