बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी से फिर चर्चा में आया ‘बुलडोजर कल्चर’, नगर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

Global Bharat 19 May 2026 09:33: PM 2 Mins
बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी से फिर चर्चा में आया ‘बुलडोजर कल्चर’, नगर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने एक ऐसी टिप्पणी की है, जिसने बुलडोजर कल्चर पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरा मामला जुड़ा है टीसीएस वाली निदा खान को शरण देने वाले पार्षद मतीन पटेल से....जो हाईकोर्ट में जाकर ये गुहार लगाते हैं कि जज साहब नगर निगम ने हमारा मकान तोड़ दिया, नियम का पालन नहीं हुआ, हमारे खिलाफ गलत कार्रवाई हुई है, जिसे सुनने के लिए जस्टिस सिद्धेश्वर थोम्बरे की बेंच बैठती है और छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम को खूब सुनाया...टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जज साहब कहते हैं

घर बनाना आसान काम नहीं है. हर कोई आपकी और हमारी तरह घर नहीं बना सकता. महाराष्ट्र में बुलडोजर कल्चर को मत आने दीजिए. ये यूपी या बिहार नहीं है. ये कार्रवाई पूरी तरह मनमानी है. इस कार्रवाई ने पूरे परिवार को बेघर कर दिया. 

जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या बुलडोजर कल्चर कॉपी करने के चक्कर में महाराष्ट्र के एक नगर निगम के अधिकारियों ने आंख बंद कर कार्रवाई कर दी, क्योंकि हाईकोर्ट में जो सवाल उठे उसमें सबसे बड़ी बात यही रही कि क्या नगर निगम ने ये जांच ठीक से की कि कौन सा हिस्सा अवैध है और किसे गिराया जाना है...नगर निगम के वकील तो ये तक कहने लगते हैं कि अब बुलडोजर एक्शन हो चुका है इसलिए याचिका निष्प्रभावी हो गई, जिस पर हाईकोर्ट और भड़क उठता है...और अब सवाल उठ रहा है कि क्या नगर निगम को जुर्माना चुकाना होगा. क्योंकि

13 मई को नगर निगम ने AIMIM पार्षद मतीन पटेल के घर और दफ्तर पर बुलडोजर चलाया था. जहां पुलिस पूरी तैयारी के साथ एक्शन के लिए गई थी
दावा किया जा रहा है मकान के बगल की संपत्तियां भी तोड़ दी गईं, अमजद खान की बिल्डिंग मेटेरियल की दुकान और मतीन पटेल के पिता के नाम का मकान भी शामिल था. 
अमजद खान का दावा है कि उनकी दुकान गुंठेवारी नियमितीकरण योजना के तहत वैध थी और इस कार्रवाई से उन्हें 20 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

इन्हीं दलीलों को सुनकर जज साहब ने नगर निगम की जमकर क्लास लगा दी, और अब अगली सुनवाई पर क्या आदेश देते हैं ये देखने वाली बात होगी, पर यहां सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या यूपी-बिहार में चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल उठाने की कोशिश हो रही है, पहले भी ऐसे सवाल कई बार उठते रहे हैं, कई बार गलत बुलडोजर एक्शन पर जुर्माना भी लगा है, लेकिन महाराष्ट्र की कहानी अलग और यूपी-बिहार की कहानी अलग नजर आती हैं...यहां तक कि अब बंगाल में भी बुलडोजर कल्चर शुरू हो चुका है, जिसकी कुछ लोग तारीफ करते हैं तो कुछ लोग आलोचना करते हैं...पर यहां सवाल ये भी उठ रहा है कि जिस निदा खान को पुलिस ने फरार घोषित किया था, जिसकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी हो रही थी, उसे ओवैसी की पार्टी के पार्षद ने जब पनाह दी तो फिर कार्रवाई के नाम पर बुलडोजर एक्शन का ही रास्ता क्यों चुना गया, क्या महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस सरकार और छत्रपति संभाजीनगर के नगर निगम ऑफिसर को बुलडोजर कल्चर पसंद आ रहा है, जिसकी गूंज महाराष्ट्र के अलग-अलग जगहों पर सुनाई देने लगी है, अगर हां तो फिर बुलडोजर की स्टीयरिंग को ध्यान से संभालना ही सबसे बड़ी कला है, वरना खुद सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं बुलडोजर की स्टीयरिंग हर कोई नहीं संभाल सकता, तो क्या महाराष्ट्र में यही हुआ...सोचिए और जवाब दीजिए...

Description of the author

Recent News