जबरन शादी के डर से घर छोड़ भागी 21 वर्षीय लड़की, बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 

Amanat Ansari 08 Jul 2026 08:46: PM 1 Mins
जबरन शादी के डर से घर छोड़ भागी 21 वर्षीय लड़की, बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 

मुंबई: ''मुझे पढ़ना है, शादी नहीं करनी... घरवाले जबरदस्ती कजिन से शादी करवा रहे हैं.'' 21 वर्षीय एक युवती की इस गुहार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ-साफ कहा कि कोर्ट किसी बालिग महिला को उसके मर्जी के खिलाफ घर वापस लौटने या शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. हैदराबाद की रहने वाली इस युवती ने 15 जून को घर छोड़ दिया.

कारण परिवार उसे अपने से करीब 10 साल बड़े चचेरे भाई के साथ जबरन शादी करवाना चाहता था. लड़की उच्च शिक्षा पूरी करके आत्मनिर्भर बनना चाहती है, लेकिन रूढ़िवादी परिवार ने उसे लगातार दबाव और धमकियां दीं. परिवार ने उसके गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. खतरे को भांपते हुए युवती ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कार्यवाहक चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखद की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, ''वह 21 साल की बालिग महिला है. वह यह फैसला करने के लिए पूरी तरह सक्षम है कि वह कहां रहना चाहती है, शादी करनी है या नहीं, और आगे पढ़ाई करना चाहती है या नहीं. ये सभी व्यक्तिगत पसंद के मामले हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित हैं. न माता-पिता और न ही राज्य उसे अपनी इच्छा के खिलाफ मजबूर कर सकता है.''

कोर्ट ने माता-पिता के आश्वासन को स्वीकार किया कि अब शादी का दबाव नहीं डाला जाएगा, लेकिन साफ कहा कि बेटी की खुद की पसंद माता-पिता के आश्वासन से ऊपर है. अदालत ने तेलंगाना पुलिस को गुमशुदगी की रिपोर्ट बंद करने का भी आदेश दे दिया. यह फैसला उन हजारों लड़कियों के लिए राहत की खबर है जो रूढ़िवादी परिवारों में अपनी पढ़ाई, करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रही हैं. 

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