नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पहलगाम हमले को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे. यह बैठक कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (सीसीपीए) की होगी, जिसे 'सुपर कैबिनेट' भी कहा जाता है, क्योंकि यह कैबिनेट कमेटियों में सबसे शक्तिशाली है. इससे पहले, मंगलवार को प्रधानमंत्री ने अपने दिल्ली स्थित आवास पर एक उच्च-स्तरीय बैठक की थी. इस बैठक में उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों को पहलगाम हमले का जवाब देने के लिए "पूरा ऑपरेशनल आजादी" दी. मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली है कि सुबह 11 बजे सबसे पहले कैबिनेट सुरक्षा कमेटी (CCS) की बैठक की जाएगी, फिर CCPA यानी Cabinet Committee on Political Affairs मीटिंग होगी. तीसरी बड़ी बैठक आर्थिक मामलों की कमेटी (CCEA) के साथ होगी और आखिरी बैठक कैबिनेट की होगी.
सूत्रों के अनुसार, यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कदम उठाने के लिए लिया गया है. सीसीपीए की बैठक में देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होती है और बड़े फैसले लिए जाते हैं. पहले भी, फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद सीसीपीए की बैठक हुई थी, जिसमें सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई थी और आतंकवाद से निपटने की रणनीति बनाई गई थी. इसके कुछ दिनों बाद, 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमले किए थे.
सीसीपीए में वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (अध्यक्ष), रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल शामिल हैं. यह कमेटी देश के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेती है.
इसके अलावा, आज सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की भी अध्यक्षता करेंगे. यह कमेटी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सबसे बड़े फैसले लेती है. यह पहलगाम हमले के बाद दूसरी सीसीएस बैठक होगी. पहली बैठक, जो हमले के अगले दिन हुई थी, में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े कदम उठाए थे. इनमें पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंधों को कम करना, महत्वपूर्ण सीमा मार्गों को बंद करना, सिंधु जल संधि को निलंबित करना और नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग से उनके सैन्य कर्मियों को निकालना शामिल था.
ये सभी कदम दिखाते हैं कि भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है. आज की दोनों बैठकों में आतंकी हमले के जवाब में और कदम उठाए जाने की संभावना है. सरकार और सेना मिलकर देश की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं.