Chandrashekhar controversy: यक़ीन करना मुश्किल है कि चंद्रशेखर जो जाति की आड़ में नेता बनने की कोशिश में जुटे हैं, उनके पीछे केजरीवाल समेत कई पार्टियों का हाथ है? प्रयागराज में अचानक योगी सरकार को हैरानी में डालने की साज़िश दरअसल दिल्ली में रची गई? दिल्ली से लेकर प्रयागराज तक एक ऐसी साज़िश रची जा रही है जो नहीं रोकी गई तो मोदी-योगी के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी! चंद्रशेखर ने योगी को ललकारा तो योगी के पास वो लड़की पहुंची, जिसके बाद दलितों के नेता की नींद उड़ी है! इस लड़की की फोटो इंटरनेट पर वायरल हैं,? इस लड़की के साथ चंद्रशेखर ने क्या किया है? लड़की की बात कोई नहीं सुन रहा था, खुद पीएम मोदी के पास पहुंची? एक ऐसा ख़त पीएम को लिखती है कि दिल्ली से लेकर लखनऊ तक भूचाल मच जाता है? चंद्रशेखर जो जाति के नाम पर योगी की कुर्सी चाहते हैं उनके बारे में लड़की ने क्या लिखा है जरा पढ़िए!
“प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,
सर, 'मैंने भारत की बेटी होने के नाते विश्व पटल पर हमेशा अपने देश का सम्मान बढ़ाने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन अब बात न्याय, आत्मसम्मान ,स्वाभिमान की है मैं चाहती हूं मेरे साथ न्याय हो !! मैंने अपनी शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग, दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेज दी है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है...इस हादसे ने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया है और समाज के ठेकेदार एक महिला को ही अपमानित कर रहे हैं!! लंबे समय तक डर, डिप्रेशन, अवसाद में रहने के बाद अब इतनी हिम्मत की है की मैं लड़ सकूं न्याय और सम्मान के लिए यह लड़ाई लाखों, करोड़ों महिलाओं के आत्मसम्मान की है. प्रधानमंत्री जी आप से मेरी प्रार्थना है कि मुझे न्याय दिलाया जाए. मैंने शिकायत सभी जगह भेज दी है. मुझे पूरा विश्वास है अपने देश के कानून पर...”
जैसे ही ये चिट्ठी PMO यानि पीएम मोदी के कार्यालय पहुंची वैसे ही चंद्रशेखर की नींद उड़ गई? चंद्रशेखर फिर कहने लगे मुझे जान से मारने की धमकी मिली है? तो क्या वो कहानी को पलटने लगे है? क्योंकि UP की कोई लड़की, मोदी से गुहार लगाए तो योगी क्या करेंगे? ये किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है? लेकिन सवाल उठता है कि चंद्रशेखर अपने समर्थकों के साथ प्रयागराज को आग के हवाले क्यों करते है? इसमें केजरीवाल और राहुल गांधी का क्या योगदान है.
समझिए पंडित नेहरू की विरासत की लड़ाई फुलपूर में खुलकर आई, केजरीवाल के कहने पर चंद्रशेखर पहुंचे प्रयागराज, ऐसा खुलासा योगी सरकार भी हैरान. 4 महीने पहले ही योगी सरकार के पास पहुंची थी रिपोर्ट, फुलपूर में होने वाला है कोई जातीय संघर्ष...देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में पहली लोकसभा में पहुंचने के लिए इसी सीट को चुना और लगातार तीन बार 1952, 1957 और 1962 में उन्होंने यहां से जीत दर्ज की. 1962 में तो समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया ने भी इस सीट से चुनाव लड़ा, नतीजा ये सीट तभी वीआईपी बन गई थी. 1967 के चुनाव में पंडित नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी ने यहां से जीत हासिल की. हालांकि विजय लक्ष्मी के संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधि बनने के बाद यहां कांग्रेस की पकड़ कमजोर होने लगी.
साल 1984 में रामपूजन पटेल ने यहां कांग्रेस को जीत दिलाई. हालांकि बाद में सपा ने यहां पकड़ बनाई, माफिया अतीक भी यहां से जीता, हालांकि कांशीराम यहां से लड़े तो हार गए. कांशीराम ने यहां से चुनाव लड़ा है, इसलिए चंद्रशेखर मायावती को छोटा साबित करने के लिए यहां से चुनाव लड़ सकते हैं, और ये साबित करने की कोशिश करेंगे जो काम कांशीराम नहीं कर पाए वो काम चंद्रशेखर ने कर दिखाया है! लेकिन ये बात हज़म नहीं होती है, इस कंड के पीछे सिर्फ चंद्रशेखर का हाथ है या कुछ और लोग शामिल है? फूलपुर सीट की लड़ाई योगी की कुर्सी तक पहुंची, इसलिए कौशांबी में घटना घटी, प्रयागराज के करछना में घटना हुई, लेकिन आन्दोलन होता है फूलपूर में, जो काफी दूर है!
बीजेपी ने साल 2014 में ये सीट जीती, पिछड़े नेताओं के लिए ये सीट काफी उपयोगी है! केशव भी यही से चुनाव जीते! साल 2018 में जब उपचुनाव हुए तो सपा ने जीत हासिल कर ली. लेकिन 2024 में बीजेपी के प्रवीण पटेल यहां से सांसद बने. और अब 2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीते साल इस सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी ने बाजी भी मारी है, इसलिए सपा से लेकर भीम आर्मी तक की नजर इस सीट पर है...चंद्रशेखर को न दलितों से मतलब है ना ही पीड़ितों से उन्हें सियासत चमकाने से मतलब है? लेकिन योगी क्या उन्हें छोड़ देंगे ये वक्त बताएगा!