चीन का नया 100GW माइक्रोवेव वेपन दुनिया के लिए खतरे की घंटी? स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट भी बन सकते हैं निशाना

Global Bharat 11 Jul 2026 10:44: AM 2 Mins
चीन का नया 100GW माइक्रोवेव वेपन दुनिया के लिए खतरे की घंटी? स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट भी बन सकते हैं निशाना

नई दिल्ली : चीन ने अपनी नई पीढ़ी के हाई-पावर माइक्रोवेव (High Power Microwave-HPM) हथियार का पहली बार सार्वजनिक रूप से खुलासा किया है. चीन का दावा है कि यह सिस्टम 100 गीगावॉट (GW) तक की माइक्रोवेव ऊर्जा पैदा कर सकता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा वास्तविक क्षमता के करीब है, तो भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और अंतरिक्ष युद्ध की तस्वीर बदल सकती है.

चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में प्रकाशित अपने शोधपत्र में इस तकनीक का उल्लेख किया है. यह पहली बार है जब चीन ने अपने हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार कार्यक्रम की इतनी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की है.

HPM हथियार विस्फोटक या पारंपरिक मिसाइल की तरह लक्ष्य को उड़ाते नहीं हैं. ये बेहद शक्तिशाली माइक्रोवेव पल्स छोड़ते हैं, जो दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, रडार, संचार नेटवर्क, ड्रोन, मिसाइलों और कंप्यूटर सिस्टम को निष्क्रिय या स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकते हैं. आधुनिक युद्ध में जहां हथियारों का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर है, वहां ऐसे हथियार बेहद खतरनाक माने जाते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सबसे शक्तिशाली HPM सिस्टम 100GW क्षमता का है, जिसमें कई हाई-पावर पल्स जनरेटर एक साथ काम करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे एंटी-सैटेलाइट हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया, तो लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में मौजूद स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट नेटवर्क के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है. आम तौर पर 1GW की माइक्रोवेव पल्स भी सैटेलाइट इलेक्ट्रॉनिक्स को प्रभावित कर सकती है, ऐसे में 100GW क्षमता कहीं अधिक विनाशकारी हो सकती है.

चीन ने इस सिस्टम के लिए नया लिथियम-आयन कैपेसिटर हाइब्रिड सिस्टम भी विकसित किया है. दावा है कि यह माइनस 40 डिग्री सेल्सियस जैसे बेहद ठंडे इलाकों में भी तुरंत सक्रिय होकर लगातार ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है. इससे ध्रुवीय क्षेत्रों और कठिन मौसम में भी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ेगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन कई गीगावॉट क्षमता वाले माइक्रोवेव हथियार विकसित कर चुका है और इनमें से कुछ सिस्टम सेना को सौंपे भी जा चुके हैं. भविष्य में इन हथियारों को और छोटा, सस्ता और अधिक सटीक बनाने की योजना है ताकि इन्हें विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म पर आसानी से तैनात किया जा सके.

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्ध केवल मिसाइलों और टैंकों से नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ठप करने वाली तकनीकों से भी लड़े जाएंगे. चीन का यह खुलासा संकेत देता है कि वह लेजर, माइक्रोवेव और अन्य डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि, चीन द्वारा बताए गए 100GW प्रदर्शन के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

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